Sunday, Jan 23, 2022
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बजट 2018: बेरोजगार युवाओं के लिए मोदी सरकार ला सकती है ये नई नीति

  • Updated on 1/30/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। मोदी सरकार ने सत्ता में आने से पहले वादा किया था कि वो ज्यादा से ज्यादा नौकरियों का सृजन करेंगे। लेकिन चार साल में सरकार आपने इस वादे को लेकर कई बार आलोचना का शिकार होती रही है। अब माना जा रहा है कि गुरूवार के पेश होने वाले बजट में सरकार नई रोजगार नीति ला सकती है। लोकसभा चुनाव 2019 से पहले सरकार का यह अंतिम पूर्ण बजट है इसलिए सरकार रोजगार के मोर्चे पर कोई बड़ा ऐलान कर सकती है। 

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याद हो कि सत्ता में आने से पहले मोदी सरकार ने हर साल एक करोड़ नौकरियों का सृजन करने का ऐलान किया था। लेकिन असल में सरकार हर साल महज  1.35 लाख नौकरियों का सृजन कर पाई है। अब सरकार के तमाम नीति नियंता इपीएफ के आंकड़ों के आधार पर यू साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि देश में रोजगार का पर्याप्त सृजन हो रहा है। संयुक्त राष्ट्र लेबर रिपोर्ट के अनुसार 2018 में भारत में बेरोजगारों की संख्या 1.8 करोड़ तक पहुंच गई है। 

इसी कारण मोदी सरकार को अगले चुनाव से पहले रोजगार तोजी से बढ़ाने की दिशा में कुछ ठोस उपाय करने होंगे। सरकार को सामाजिक आर्थिक और श्रम   नीति के दखल और सुधारों के द्वारा बहुउद्देशीय रोजगार सृजन नीति और विस्तृत
खाका तैयार करना होगा। इस बात की पूरी संभावना है कि सरकार बजट में ऐसे कर सकती है। इस दिशा में नीति आयोग ने इस दिशा में काम करते हुए इसी महीनें एक पॉलिसी पेपर तैयार किया था। इस पेपर में रोजगार बढ़ाने के लिए सरकार को
कई सुझाव भी दिए  गए है। इस पेपर में चुछ मुख्य बाते इस प्रकार है। 

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- देश की जनसंख्या का 45 फीसदी हिस्सा जीडीपा के उस फीसदी पर निर्भर है जिसमें महज 3 फीसदी की दर से बढ़त हो रही है। वहीं दूसरी ओर जनसंख्या का 55 फीसदी हिस्सा जीडीपी के उस 83 फीसदी हिस्से पर निर्भर है जिसमें सालाना 9 फीसदी की दर से बढ़त (मैन्युफैक्चरिंग और सेवाएं) हो रही है। 

-आर्थिक तरक्की का केंद्र गहन रोजगार वाले सेक्टर होने चाहिए

-श्रम शक्ति में महज 27 फीसदी महिलाएं, जबकि 75 फीसदी पुरुष भागीदार हैं

-अभी हाल यह है कि आर्थिक तरक्की का ज्यादा हिस्सा कम रोजगार वाले क्षेत्रों जैसे वित्त, रियल एस्टेट आदि से आता है. ज्यादा रोजगार कम वेतन वाले सेक्टर्स में है। 80 फीसदी से ज्यादा फर्म में 50 या उससे भी कम कर्मचारी हैं। भारत को अपने श्रम कानून में बदलाव करना होगा ताकि वित्त और बुनियादी ढांचा सेक्टर को मदद मिल सके। 

-इस समय करीब 1.23 करोड़ श्रमिक सरप्लस यानी जरूरत से ज्यादा हैं, जबकि हर साल 60 लाख नए श्रमिक आ जाते हैं।
-नौकरियों के सृजन के साथ ही कौशल विकास पर जोर देना होगा     


 

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