Sunday, Dec 08, 2019
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बजट 2019-20 : पेट्रोल, डीजल के जरिए मोदी सरकार ने जनता पर डाला भार

  • Updated on 7/5/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। नए जानादेश के साथ लौटी नरेंद्र मोदी भाजपा सरकार ने पेट्रोल, डीजल के जरिए जनता पर बड़ा भार डाला है। वित्तीय चुनौतियों के बीच पेश मोदी सरकार के इस बजट से राहत की उम्मीद लगाए बैठे नौकरीपेशा और मध्य वर्ग की उम्मीदें धरी रह गयीं। लोगों और विपक्ष को उम्मीद थी कि सरकार पेट्रोल, डीजल के करों को जीएसटी में डालकर लोगों को राहत देगी, लेकिन अब ऐसा संभव होता नजर नहीं आ रहा है।

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सरकार ने पेट्रोल, डीजल पर उपकर और सोने पर आयात शुल्क बढ़ा दिया गया है। सीतारमण ने अतिरिक्त संसाधन जुटाने के लिए पेट्रोल और डीजल पर प्रति लीटर एक रुपये अतिरिक्त विशेष उत्पाद शुल्क और उपकर लगाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल के दाम नीचे बने हुए हैं। इससे उन्हें इन उत्पादों पर कर समीक्षा का मौका मिला है। 

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सरकार के इस कदम का विपक्ष और जनता में रोष देखा जा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि मोदी सरकार ने पिछले पांच सालों में पेट्रोल, डीजल पर जनता को लूटा है। पेट्रोल, डीजल के दाम बाजार के हवाले करने के बावजूद सेस जनता के जख्मों पर नमक छिड़कने के समान है। बता दें कि पेट्रोल, डीजल पर सेस लगाने के बाद इनके दाम में दो रुपये अतिरिक्त इजाफा होगा। केंद्र के साथ राज्य सरकार भी सेस लगाने से नहीं चूकेंगी। 

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दरअसल, पेट्रोल, डीजल के दाम बढ़ने से रोजमर्रा की चीजों के दाम में भी इजाफा होने का अंदेशा बढ़ जाता है। माल ढुलाई और परिवहन सुविधा में भी इजाफा होने से आम चीजों के दाम में भी बढ़ोत्तरी हो जाती है। लेकिन, सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद को प्रोत्साहित करने के लिए वाहन ऋण पर कर छूट का लाभ दिया है।   

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