Thursday, Jan 27, 2022
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businessman angry over chinas tactics on kashmir issue boycott chinese goods

कश्मीर मुद्दे पर चीन की चालबाजी से व्यापारी नाराज, करेंगे चीनी वस्तुओं का बहिष्कार

  • Updated on 8/19/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) के मुद्दे पर चालबाज चीन द्वारा पाकिस्तान (Pakistan) का समर्थन करने से नाराज खुदरा व्यापारियों (Businessmen) ने चीनी वस्तुओं के बहिष्कार (Ban) की घोषणा की है। इस साल हुए आम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी का समर्थन करने वाले खुदरा व्यापारियों के संगठन कैट ने कहा है कि वह चीन में वस्तुओं के बहिष्कार के लिए एक सितंबर को राष्ट्रीय स्तर के अभियान की शुरूआत करेगा। 

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29 को दिल्ली में तय की जाएगी रणनीति
कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी. भारतिया व राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने आज बताया कि इस संदर्भ में 29 अगस्त (August) को व्यापारियों के नेताओं के एक सम्मेलन का आयोजन दिल्ली में किया जाएगा। इस सम्मेलन में आगे की रणनीति तय की जाएगी। खंडेलवाल ने कहा कि चीन को भारत के खिलाफ किसी भी मुद्दे पर पाकिस्तान का समर्थन करने की आदत पड़ चुकी है इसलिए अब समय आ गया है कि चीनी वस्तुओं पर निर्भरता कम की जाए। 

चीनी वस्तुओं पर निर्भरता कम की जाए
उन्होंने कहा कि भारत चीन के लिए बड़ा बाजार है। देश के व्यापार घाटे में चीन से होने वाले व्यापार का योगदान 40 प्रतिशत का है। वित्त वर्ष 2017-18 में चीन से 90 अरब डॉलर का आयात किया गया था। इसके बावजूद वह भारत के उचित रुख का समर्थन करने की बजाय पाकिस्तान का पक्ष लेता रहता है।

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चीन से तस्करी के मामलों में बढ़ौतरी
भरतिया और खंडेलवाल ने कहा कि नरेश गुजराल की अध्यक्षता वाली वाणिज्य संबंधी स्थायी समिति ने जुलाई 2018 में ‘भारतीय उद्योग पर चीनी वस्तुओं के प्रभाव’ पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी और सिफारिश की थी कि चीनी सामान के आयात पर एक एंटी डंपिंग ड्यूटी लगाई जानी चाहिए। सरकार को अवैध आयात और तस्करी को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिएं। 

चीन से जब्त किए गए तस्करी के सामान का मूल्य 2016-17 में 1,024 करोड़ रुपए था और साल दर साल यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। समिति ने यह भी कहा कि असंगठित खुदरा क्षेत्र में खराब गुणवत्ता वाले चीनी उत्पाद बेहद हावी हैं। इस क्षेत्र में घरेलू लघु उद्योग शामिल हैं, जो अधिक महंगे लेकिन बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पादों का उत्पादन करते हैं। समिति ने सुझाव दिया है कि घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए तैयार माल के आयात पर उच्च दर और कच्चे माल पर कम कर लगाया जाना चाहिए।

चीनी वस्तुओं पर बढ़े आयात शुल्क
चीनी उत्पादों के बहिष्कार का आह्वान करते हुए कैट ने सरकार से आग्रह किया है कि पहले कदम के रूप में चीनी वस्तुओं के आयात पर 300 से 500 फीसदी तक का आयात शुल्क लगाया जाना चाहिए। कम विकसित देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों पर पुनॢवचार किया जाना चाहिए क्योंकि उनके माध्यम से बड़ी संख्या में चीनी सामान भारत आता है और ऐसे में एंटी डंपिंग या आयात शुल्क में वृद्धि का कोई औचित्य नहीं रह जाता है। कैट ने सरकार से प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उच्च गुणवत्ता वाले सामान का उत्पादन करने और उनकी क्षमता का लाभ उठाने के लिए स्थानीय लघु उद्योग के विकास के लिए एक विशेष पैकेज की घोषणा करने का भी आग्रह किया है। खिलौने जैसे लघु उद्योग के लिए मेक इन इंडिया के तहत चिप्स, मोटर सहित अन्य इलैक्ट्रॉनिक वस्तुओं का निर्माण देश में होना चाहिए।

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