Tuesday, Oct 04, 2022
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कावंडिय़ों की सेवा कर, गंगा जमुनी तहजीब की पहचान को पुख्ता कर रहे हैं तौहीद आलम

  • Updated on 7/21/2022

नई दिल्ली/टीम डिजीटल। सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। ये बात आपने कई बार सुनी होगी। लेकिन अगर साक्षात इसे व्यवहार में लाते हुए देखना है तो मुरादनगर में गंग नहर किनारे मौजूद गंग नहर फूड़ पाइंट पर आ जाइए। जहां के मालिक तौहीद आलम ने कावडिय़ों के लिए अपने फूड़ स्टॉल को बंद कर इसे कावंडिय़ों की सेवा के लिए खोल दिया है। यहां आकर कावडिय़ां विश्राम करते हैं और फिर आगे अपने गंतव्य की ओर बढ जाते हैं। 

बीते 9 वर्षों से कर रहे हैं कावंडिय़ों की सेवा 
तौहीद आलम बताते हैं कि वह 2013 से नियमित तौर पर हर सावन में कावंडिय़ों की सेवा कर रहे हैं। सावन माह में जब भी कावंड़ यात्रा शुरू होती है तो वह अपने रेस्त्रां को बंद कर इसे कावंडिय़ों के लिए विश्रामघर में बदल देते हैं। जिसमें रोजाना करीब 5 सौ से 7 सौ कावंडि़ए आकर विश्राम करते हैं। हालांकि बीते 2 वर्षों से कोरोना की वजह से जरूर सेवा रूकी हुई थी। जिसे इस साल फिर से शुरू किया गया है। 

मुरादनगर की गंगा जमुनी तहजीब ने किया प्रेरित 
तौहीद बताते हैं कि मुरादनगर की गंगा जमुनी तहजीब ने उन्हें कावंड़ यात्रा के दौरान शिवभक्तों की सेवा के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि देश में कैसा भी माहौल रहा हो। मुरादनगर में कभी भी भाईचारे की भावना को किसी ने भुलाया नहीं। इसलिए वह मुस्लिम होते हुए भी जब कावंड़ यात्रियों की सेवा करते हैं तो कोई प्रश्न नहीं उठाता। तौहीद आलम मुरादनगर में होने वाली रामलीला कमेटी के सदस्य भी हैं। 

परिवार भी बंटाता है सेवा में हाथ 
तौहीद अकेले ही कावंड़ यात्रियों की सेवा नहीं करते। इसमें उनका परिवार और रेस्त्रां के कर्मचारी भी हाथ बंटाते हैं। कावंडिय़ों की सेवा के लिए 40 से 50 आदमी लगातार शिविर में मौजूद रहते हैं जो शिवभक्तों की हर छोटी बड़ी जरूरत का ख्याल रखते हैं। 
 

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