Thursday, May 06, 2021
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गृह मंत्री अमित शाह का बड़ा एलान- तीन महीने में होगा राम मंदिर का निर्माण

  • Updated on 1/22/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सीएए (CAA) के समर्थन में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने जनसभा के दौरान राम मंदिर को लेकर बड़ा एलान किया है। अमित शाह ने कहा कि तीन महीने के अंदर अयोध्या (Ayodhya) में भगवान श्रीराम की जन्मभूमि स्थल पर मंदिर का निर्माण शुरू हो जाएगा। शाह ने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि राम मंदिर निर्माण में कांग्रेस सहित कई विपक्षी दल इसे लटकाए रखना चाहते थे, लेकिन हमारी सरकार ने ऐसा होनें नहीं दिया।

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विपक्ष पर बरसे अमित शाह
लखनऊ के बंगला बाजार रामकथा पार्क में गृहमंत्री अमित शाह बोले हम लोगों का जीवन धन्य है कि हमारी सरकार रहते अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण होनें जा रहा है। कांग्रेस (Congress) के नेता कपिल सिब्बल (Kapil Sibal) कोर्ट में कहते रहे कि अभी सुनवाई न करिए। केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद सर्वोच्च न्यायालय में जल्द सुनवाई शुरू कराने की कोशिश हुई तो भी सिब्बल ने कई बार अड़ंगा डाला। शाह ने कहा कि जनता ने 303 सीटों के साथ मोदी की सरकार फिर बनवाई तो केंद्र के प्रयास से सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई फिर तेज हुई।

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सुप्रीम कोर्ट का फैसला
देश की सबसे बड़ी अदालत ने सबसे बड़े फैसले में अयोध्या की विवादित जमीन पर रामलला का हक माना था, जबकि मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में ही 5 एकड़ जमीन देने का आदेश दिया गया है। पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई (Justice Ranjan Gogoi) की अध्यक्षता वाली 5 जजों की विशेष बेंच ने ये फैसला सुनाया था। इस बेंच में पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस शरद अरविंद बोबड़े, जस्टिस धनंजय यशवंत चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नज़ीर शामिल थे। राम मंदिर का मामला काफी दिनों से कोर्ट में लंबित था, जिसके बाद साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर फैसला सुनाया था।

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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया
जानकारी के लिए बता दें कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से पहले इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) ने 2010 में अपना फैसला सुनाया था। 30 सितंबर, 2010 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2.77 एकड़ जमीन का बंटवारा कर दिया था। कोर्ट ने यह जमीन सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला विराजमान के बीच जमीन बराबर बांटने का आदेश दिया था। जिसके बाद हाई कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिस पर लंबी सुनवाई के बाद 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया और विवादित जमीन रामलला को देने का आदेश दिया था।


 

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