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CAA-NRC Protest: वृन्दावन में बरसों से रह रहे दो बांग्लादेशी नागरिक गिरफ्तार

  • Updated on 1/25/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। देश में सीएए (CAA) और एनआरसी (NRC) को लेकर लगातार विरोध जारी है। इस बीच उत्तर प्रदेश (Uttar Praesh) के मथुरा (Mathura) जिले में पुलिस ने वृन्दावन (Vrindavan) में कई बरसों से रह रहे दो बांग्लादेशियों (Bangladeshi) को गिरफ्तार किया है। ये लोग साधु बन कर कीर्तन-भजन किया करते थे। इनमें से एक के पास से पासपोर्ट (Passport) भी बरामद हुआ है।    

साधु बनकर बरसों से रह रहे थे दोनों 
पुलिस के अनुसार पकड़े गए विदेशी नागरिकों में से एक का नाम मानव है जो यहां आठ वर्ष से रह रहा था। वहीं दूसरे का नाम केशव है जो सात साल से यहां रह रहा था। इससे पूर्व ये दोनों बचपन में बीस साल पहले वृन्दावन आ चुके थे। उसके बाद अब साधु बनकर हमेशा के लिए यहीं बस गए हैं।

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दोनों बांग्लादेशी को जेल भेजा गया
कोतवाली प्रभारी इंस्पेक्टर संजीव कुमार दुबे ने बताया, "इन दोनों को खुफिया पुलिस से मिली जानकारी के आधार पर बीती रात इमलीतला क्षेत्र से पकड़ा गया है।" उन्होंने बताया कि बांग्लादेशी नागरिकों ने यहां रहते नागरिकता संबंधी सभी कागजात, आधार कार्ड आदि तैयार करा लिए थे। दोनों को न्यायालय में पेश किए जाने के बाद जेल भेज दिया गया है।

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बता दें कि भारत सरकार ने देशभर में नागरिकता संशोधन कानून को लागू कर दिया है। इस कानून के तहत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक कारणों से सताए जाने के बाद वहां से भागकर 31 दिसंबर, 2014 तक भारत आए हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को देश की नागरिकता दी जाएगी।

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इन राज्यों में लागू नहीं होगा CAA
लोकसभा में बिल को लेकर हो रही जोरदार बहस के बीच अमित शाह में साफ कर दिया कि ये बिल अरूणाचल प्रदेश, मिजोरम, नागालैंड ( दीमापुर को छोड़कर), त्रिपुरा (करीब 70%) के साथ पूरे मेघालय में यह कानून मान्य नहीं होगा। उन्होंने बिल को लेकर कहा, उत्तरपूर्व के राज्यों को सीएबी ने डरने की कोई जरूरत नहीं है। 

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नागरिकता अधिनियम 1955 के प्रावधानों में संशोधन
बता दें कि नागरिकता अधिनियम 1955 के प्रावधानों में संशोधन कर ये बिल लाया गया है। इस संशोधन में मुख्यत: किसी को भी नागरिकता किस आधार पर दी जाए इन प्रवाधानों में सोंशधन किया गया है। इस प्रकार के संशोधन के द्वारा मुस्लिम राष्ट्रों जैसे पाकिस्तान, बांग्लादेश, और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाइयों के लिए बिना किसी वैध दस्तावेजों के भी भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान किया जाएगा। जिसके चलते गैर मुस्लिम लोगों के लिए भारतीय नागरिकता हासिल करने का रास्ता साफ हो जाएगा। 

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