Monday, Jan 27, 2020
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CAA प्रदर्शनः HC ने दिल्ली पुलिस को लगाई फटकार, कहा- PAK में नहीं है जामा मस्जिद

  • Updated on 1/14/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दिल्ली (Delhi) की एक अदालत ने भीम आर्मी (Bhim Army) के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद (Chandra Shekhar Azad) के खिलाफ कोई सबूत नहीं दिखा पाने को लेकर मंगलवार को दिल्ली पुलिस (Delhi Police) की खिंचाई की और कहा कि लोग सड़कों पर इसलिए हैं क्योंकि जो चीजें संसद के अंदर कही जानी चाहिए थी, वे नहीं कही गईं।

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कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को फटकारा
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कामिनी लाऊ ने कहा कि दिल्ली पुलिस ऐसे बर्ताव कर रही है जैसे कि जामा मस्जिद (Jama Masjid) पाकिस्तान है और यदि ऐसा है तो भी कोई भी व्यक्ति वहां शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर सकता है। न्यायाधीश ने कहा कि पाकिस्तान (Pakistan) एक समय अविभाजित भारत का हिस्सा था। अदालत की टिप्पणी आजाद की जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान आई। आजाद को पुरानी दिल्ली (Old Delhi) के दरियागंज (Daryaganj) में सीएए (CAA) विरोधी प्रदर्शन से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार किया गया था।

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पाकिस्तान में नहीं है जामा मस्जिद
न्यायाधीश ने कहा, "संसद के अंदर जो बातें कही जानी चाहिए थीं, वे नहीं कही गयीं। यही वजह है कि लोग सड़कों पर उतर गये हैं। हमें अपना विचार व्यक्त करने का पूरा हक है लेकिन हम देश को नष्ट नहीं कर सकते।" अदालत ने कहा, "आप ऐसे बर्ताव कर रहे हैं जैसे जामा मस्जिद पाकिस्तान हो और यदि वह पाकिस्तान है तो भी आप वहां जा सकते हैं और प्रदर्शन कर सकते हैं। पाकिस्तान अविभाजित भारत का हिस्सा था।"

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भड़काऊ भाषण के सबूत दें पुलिस
अदालत ने पुलिस के जांच अधिकारी से उन सारे सबूतों को पेश करने को कहा जो दर्शाते हों कि आजाद जामा मस्जिद में सभा को कथित रूप से भड़काऊ भाषण दे रहे थे। जांच अधिकारी से ऐसा कानून भी बताने को कहा गया जिससे पता चले कि सभा असंवैधानिक थी। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख बुधवार तय की। सुनवाई के दौरान पुलिस ने कहा कि उसके पास सबूत के तौर पर बस सभा की ड्रोन तस्वीरें हैं, अन्य कोई रिकॉर्डिंग नहीं है। इस पर न्यायाधीश ने कहा, "क्या आप सोचते हैं कि दिल्ली पुलिस इतनी पिछड़ी है कि उसके पास किसी चीज की रिकॉर्डिंग करने के यंत्र नहीं हैं?"

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क्या आपने संविधान पढ़ा है- HC
अदालत ने कहा, "मुझे कुछ ऐसी चीज या कानून दिखाइए जो ऐसी सभा को रोकता हो... हिंसा कहां हुई? कौन कहता है कि आप प्रदर्शन नहीं कर सकते... क्या आपने संविधान पढ़ा है। प्रदर्शन करना किसी भी व्यक्ति का संवैधानिक अधिकार है।"

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