Tuesday, Feb 25, 2020
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हंगामे के बीच CAA पर बोले बोबडे- नागरिकता सिर्फ अधिकार नहीं बल्कि कर्तव्यों के बारे में भी है

  • Updated on 1/19/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। भारत के प्रधान न्यायाधीश शरद अरविंद बोबडे ने शनिवार को कहा कि नागरिकता सिर्फ लोगों के अधिकारों के बारे में ही नहीं बल्कि समाज के प्रति उनके कर्तव्यों के बारे में भी है। राष्ट्रसंत तुकादोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय (आरटीएमएनयू) के 107वें दीक्षांत समारोह में यहां अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि कुछ शिक्षण संस्थान बेहद वाणिज्यिक मानसिकता के हो गए हैं, जबकि शिक्षा का असली उद्देश्य मेधा और चरित्र का विकास करना है।

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शिक्षा का प्रचार प्रसार तेजी से हो रहा है
उन्होंने कहा, ‘आज शिक्षा का प्रचार-प्रसार तेजी से हो रहा है। दुर्भाग्य से कुछ ऐसे संस्थान हैं, मैं विश्वविद्यालयों के बारे में बात नहीं कर रहा, जो बेहद वाणिज्यिक मानसिकता वाले बन गए हैं। मैं यह कुछ संस्थानों को लेकर अपने निजी ज्ञान के आधार पर कह रहा हूं जो कानून की शिक्षा देते हैं।’ प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि जिस सबसे महत्वपूर्ण सवाल का हमें जवाब तलाशना चाहिए वह यह कि विश्वविद्यालय शिक्षा का उद्देश्य क्या होना चाहिए।

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डिग्रियां अंत नहीं, एक साधन है
विश्वविद्यालय (University) निश्चित रूप से ईंट और पत्थर के बारे में नहीं है। विश्वविद्यालयों को किसी उत्पादन इकाई की तरह काम नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस बात पर जोर देना भी बेहद जरूरी है कि विश्वविद्यालय की डिग्रियां अपने आप में अंत नहीं हैं, बल्कि अंत के लिए एक साधन हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि विश्वविद्यालय का विचार यह दर्शाता है कि एक समाज के तौर पर हम क्या हासिल करना चाहते हैं।

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