Wednesday, Aug 10, 2022
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CAG ने 6 नए एम्स के निर्माण पर उठाए सवाल, मोदी सरकार को खींचा

  • Updated on 8/7/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। कैग ने प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (पीएमएसएसवाई) के तहत 6 नए एम्स की स्थापना में 4-5 वर्ष की देरी पर केंद्र की मोदी सरकार की खिंचाई की। रिपोर्ट में अपूर्ण परियोजना, प्रशासनिक उदासीनता, कमजोर निगरानी का भी जिक्र किया गया है।

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इन 6 नए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) का काम पूरा होने की तारीख अगस्त 2011 से जुलाई 2013 के बीच निर्धारित थी। प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना पर नियंत्रक और महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट आज संसद में पेश की गई। 

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रिपोर्ट में कहा गया है कि कार्य का सही से क्रियान्वयन नहीं हुआ और ठेकेदारों को भी अतिरिक्त भुगतान करना पड़ा। इन सब कारणों से 140.28 करोड़ रुपये का वित्तीय बोझ पड़ गया। इसमें ठेकेदारों को 39.96 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान भी शामिल है।  

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इस रिपोर्ट में 2003 से 2017 के बीच के कार्यों का लेखा-जोखा है। इसमें कहा गया है कि नए एम्स में मंजूर 42 विभागों में से कई विभाग शुरू नहीं हो पाया और अस्पतालों में 43 फीसदी से 84 फीसदी के बीच बिस्तरों की कमी थी। उपकरण लगाने में 3 महीने से 42 महीने तक की देरी हुई और 2 साल तक 454 करोड़ रुपये अनुमानित लागत के उपकरण की आपूर्ति नहीं हो सकी।

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विमान सौदे को लेकर भी उठाए सवाल

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के दौरान नौसेना के लिए बोइंग को दिए गए 2.1 अरब डालर के विमानों के ठेके पर सवाल उठाया है। कैग ने कहा कि पी-81 समुद्री टोही विमान का बेड़ा खरीदने के लिए प्रतिद्वंद्वी बोलीदाता स्पेन की ईएडीएस सीएएसए की जगह अमेरिकी रक्षा कंपनी को तरजीह दी गई। 

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संसद में पेश अपनी रिपोर्ट में कैग ने कहा कि रक्षा मंत्रालय ने 20 साल के लिए उत्पादों के रखरखाव को लेकर स्पेन की एयरोस्पेस कंपनी की वित्तीय बोली को बढ़ाया। यह इस मान्यता पर किया गया कि बोइंग की पेशकश में इसी प्रकार का प्रावधान है। बाद में बोइंग ने अलग से अनुबंध बातचीत में विमानों के रखरखाव में मदद की पेशकश की जिस पर मोल-भाव करने की गुंजाइश थी। कैग ने इस निष्कर्ष को गलत बताया कि अमेरिकी कंपनी सबसे कम बोली लगाने वाली (एल-1) इकाई थी।     

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रिपोर्ट के अनुसार उत्पाद समर्थन लागत को शामिल कर स्पेन की कंपनी की वित्तीय बोली को बढ़ाने से वह दूसरी सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी (एल- 2) बन गई। इसमें कहा गया है कि जनवरी 2009 में बोइंग के साथ सौदे को अंतिम रूप दिया गया। यह सौदा 2.1 अरब डालर (मौजूदा विनिमय दर पर 14,500 करोड़ रुपये) का था। 

राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम लक्ष्य पूरा करने में नाकाम

राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम वर्ष 2017 तक सभी ग्रामीण बस्तियों को स्वच्छ पेयजल आपूर्ति की सुविधा उपलब्ध कराने के अपने लक्ष्य को पूरा करने में नाकाम रहा है। संसद में आज पेश नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में यह कहा गया है।

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रिपोर्ट में कहा गया है कि कार्यक्रम में कम से कम 50 प्रतिशत ग्रामीण आबादी को 2017 तक पाइप से पानी पहुंचाने का विचार था। समुचित योजना की कमी और कोष के खराब प्रबंधन के कारण विभिन्न योजनाओं के पूरा होने में बहुत देरी हुयी और लागत भी बढ़ गयी। 

रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘दिसंबर 2017 को केवल 44 प्रतिशत ग्रामीण बसाहटों और 85 प्रतिशत सरकारी स्कूलों और आंगनवाड़ी को ही स्वच्छ पेयजल मुहैया कराया जा सका। केवल 18 प्रतिशत ग्रामीण आबादी को पाइप के जरिए जलापूॢत हो सकी और सिर्फ 17 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों को घरेलू कनेक्शन प्रदान किया गया।’’     
 

 

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