Monday, Mar 01, 2021
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cag report reveals gujarat ayush department is giving inferior medicine prsgnt

घटिया दवा दे रहा है गुजरात आयुष विभाग, CAG रिपोर्ट ने खोली सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की पोल

  • Updated on 9/26/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। भारत के नियन्त्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG)  ने गुजरात में आयुष विभाग की खराब स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। कैग ने अपनी हेल्थ सेक्टर पर जारी की हालिया रिपोर्ट में आयुष विभाग की कमियों को उजागर किया है। इसके साथ ही कैग रिपोर्ट ने बताया है कि स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग द्वारा आयुष के कार्यक्रमों को मुख्यधारा में नहीं लाया गया है। 

कैग की इस रिपोर्ट में आयुष विभाग की ओर से रिसर्च की कमी, आवंटित राशि को खर्च न कर पाने जैसे मुद्दे उठाए हैं। साथ ही रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि 2015 में मंजूर हुए प्रोजेक्ट्स को आयुष मंत्रालय ने पूरा नहीं किया और आयुष दवाओं की खराब क्वालिटी और फूड एंड ड्रग कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन की ओर से चेकिंग नहीं कराता है। 

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इतना ही नहीं, इस रिपोर्ट में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाओं में योजना की कमी और मेंटल हेल्थकेयर एक्ट, 2017 के प्रावधानों के तहत काम न करने का भी मुद्दा उठाया है। साथ ही अस्पतालों की चेकिंग में मानसिक बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए सायकिएट्रिक वॉर्ड और दवाओं के स्टॉक में कमी होने की भी बात मेंशन की गई है। 

कैग रिपोर्ट में बताया गया है कि गुजरात में आठ जिलों की जांच की गई थी लेकिन उनमें 324 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में से 125 में आयुष डॉक्टरों की नियुक्ति कभी हुई ही नहीं। इसका मतलब ये हुआ कि इन 8 जिलों के स्वास्थ्य केंद्र 39 फीसदी आयुष डॉक्टर के बिना ही चल रहे थे। इतना ही नहीं, इन केंद्रों पर आयुष द्वारा दवाएं भी नहीं पहुंचाई जा रही थीं। 

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कैग रिपोर्ट में इन अव्यवस्थाओं को लेकर कहा गया है कि व्यवस्था स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग को मुख्यधारा में लाने की प्लानिंग को धराशायी कर देता है। 

रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि आयुष मंत्रालय की मुख्य योजनाओं में शामिल स्कूल हेल्थ प्रोग्राम (एसएचपी) को आयुष मंत्रालय ने राज्य में लागू ही नहीं किया है। राज्य में आयुष सोसाइटी के लिए केंद्र सरकार ने जो दो करोड़ रुपए की ग्रांट जारी की थी उसमें से फरवरी 2019 तक सिर्फ 43 लाख रुपए ही खर्च किए गए। हैरानी ये है कि राशि सिर्फ स्कूल की हेल्थ बुकलेट छपवाने में इस्तेमाल की गई। 

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अपनी सफाई में गुजरात सरकार ने कहा कि जून 2020 में आयुष कार्यक्रमों को लागू न कर पाने के पीछे शिक्षा विभाग का सहयोग न करना है। वहीं अब आयुष योजनाओं को लागू करने के लिए शिक्षा विभाग के सहयोग से नई प्लानिंग शुरू करने की तैयारी की जा रही है।

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