Sunday, Apr 21, 2019

गुजरात में आदिवासी वोट से मिलेगी कांग्रेस को ऑक्सीजन! जानिए क्या है सियासी समीकरण

  • Updated on 4/15/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। गुजरात (Gujarat) को भारतीय जनता पार्टी (Bhartiya Janta party) का गढ़ माना जाता है। जिसके चलते बीजेपी काफी लंबे समय से प्रदेश में शासन कर रही है। इसी बीच कांग्रेस पार्टी (Congress party) अपनी राजनीतिक धुरी तलाशने की कोशिश कर रही है।

इसके लिए कांग्रेस की नजर आदिवासी वोटबैंक पर है। जोकि गुजरात (Gujarat) में काफी ज्यादा सिसासी फेरबदल करने में सक्षम है। गुजरात में लगभग 15 प्रतिशत आदिवासियों की आबादी है। इसके साथ ही राज्य में चार लोकसभा और 27 विधानसभा सीटों पर अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित है। 

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दरअसल राज्य में  छोटा उदेपुर, दाहोद, बारडोली और वलसाड हैं जोकि आरक्षित है। इन सीटों के अलावा भरुच, साबरकांठा, बनासकांठा और पंचमहल लोकसभा सीटों पर भी जनजातीय मतदाताओं की अच्छी खासी तादात है। 2014 के लोकसभा चुनाव में भारी मोदी लहर के चलते भाजपा ने राज्य की सभी 26 सीटों पर कब्जा किया था। हालांकि 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने आदिवासी क्षेत्रों में वापसी करने की कोशिश की। 

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दरअसल आदिवासी (tribal) क्षेत्रों में 27 विधानसभा सीट हैं। जिसमें से कांग्रेस ने 15 सीटें जीतकर अपना अपने वजूद को लौटाने की कोशिश की थी। इसके साथ ही भाजपा को कुल 9 सीटों पर जीत मिली थी। जिसके चलते कांग्रेस को एक बार फिर आदिवासी वोटबैंक साधने की चुनौती होगी। विधानसभा चुनाव में विपरित नतीजों से भाजपा एक बार फिर अपने वोट को मजबूत करने के लिए परिक्षण कर रही है। जिसके लिए पार्टी ने तीन मौजूदा आदिवासी सांसदों को दोबारा टिकट दिया है। 

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बता दें कि यहां के आदिवासी समुदाय की मांगे रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ सेवा, वन भूमि पर अधिकार और सिंचाई की सुविधाएं हैं। निर्माण स्थलों में काम करने के लिए एक लाख से अधिक आदिवासी आठ महीने से शहरों की ओर पलायन करने के लिए मजबूर हैं। कांग्रेस के विधायक मोहन सिंह राठवा ने कहा कि सरकार ने आदिवासियों को वन भूमि नहीं दी है।, जोकि बेरोजगारी के अलावा मुख्य मुद्दा है।

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