Wednesday, Oct 16, 2019
car companies in bad condition due to recession, manufacturing plants are closing

मंदी की मार से कार कंपनियों की निकली हवा, बंद हो रहे हैं कई सारे प्लांट्स

  • Updated on 8/20/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। मंदी की मार से आटोमोबाइल सेक्टर बुरी तरह से पस्त हैं। कंपनियों को बिल्कुल भी नहीं समझ में आ रहा कि आखिर इस दौर से कैसे निकला जाए। दूसरी तरफ ग्राहक भी नहीं समझ पा रहे हैं कि इस समय खरीददारी करना सही है या कुछ समय के बाद कार ली जाए। कार की मांग कम होने की वजह से कंपनियों ने अपनी उत्पादन क्षमता को घटा दिया है जबकि कुछ ने तो अपने प्लांट्स ही पूरी तरह से बंद कर दिए हैं।

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कंपनियां इस दौर से उबरने के लिए अपने अपने स्तर पर प्रयास कर रही हैं। कुछ ने अपने वर्किंग हावर्स को घटा दिए तो कुछ कार के साथ ग्राहकों को लुभावने ऑफर्स दे रही हैं, बावजूद इसके वे ग्राहकों को अपने शो रूम तक लाने में नाकाम रही हैं। कंपनी को एक एक गाड़ी बेचने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। 

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एक साथ कई सारे बदलाव से ग्राहक भी पूरी तरह से दुविधा में है कि वे खरीददारी के प्लान में किस प्रकार का चेंज करें। आटोमोबाइल के साथ साथ सरकार के लिए भी यह कड़ी परीक्षा का दौर है। सरकार को भी इस क्षेत्र में पुरानी रौनक लाने के लिए कई प्रकार के कदम उठाने पड़ेंगे। अब यह देखना होगा कि अपने दूसरे कार्यकाल में मोदी सरकार पहली छमाही में ही इस बड़े संकट से किस प्रकार से निपटती है। 

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मंदी ने देश की लगभग सभी कंपनियों को प्रभावित किया है। सभी कंपनिया फिर चाहे नंबर एक मारुती सुजकी हो या फिर कोई और सभी मंदी की गिरफ्त में हैं। मौजूदा टाइम में कंपनियों के मैनुफैक्चर स्टोर में कार डंप पड़ी हैं किसी को भी इन्हें बेचने का आइडिया समझ में नहीं आ रहा है। मारुति, महिंद्रा, हुंडई, होंडा और टाटा सभी की बिक्री में भारी गिरावट दर्ज की गई है। 

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इस साल जुलाई तक की बिक्री में मारुति को 31 फीसदी का झटका लगा है जबकि महिन्द्रा को 29 फीसदी का। आंकड़ो के मुताबिक हुंडई मोटर्स को 15 फीसदी का और टाटा को 40 फीसदी का घाटा हुआ है। मंदी की सबसे ज्यादा मार होंडा में देखने को मिला। जुलाई तक सबसे ज्यादा घाटा होंडा को ही हुआ है। कंपनी को इन सात महीनें में पिछले साल के मुताबिक 44 फीसदी का घाटा हुआ है।

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यह मंदी देश के लिए कितना खतनाक साबित हो सकती है इसको इस बात से ही समझा जा सकता है कि देश की GDP में आटो सेक्टर की 7 प्रतिशत की भागेदारी है जबकि मैन्यूफैक्चरिंग GDP में आटोमोबाइल की 49 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। अगर आटो सेक्टर को जल्द से जल्द पटरी पर नहीं लाया गया तो पूरे देश की अर्थव्यवस्था पटरी से उतर सकती है।

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मंदी के कारण बहुत से पार्ट्स बनाने वाली कंपनियों ने अपने प्रोड्क्शन को घटा दिया है, वहीं दूसरी तरफ बहुत सी कार कंपनियों ने कॉन्ट्रैक्ट बेस पर कार्य करने वाले मजदूरों को नौकरी से निकाल दिया है। एक जानकारी के अनुसार राजकोट में काम करने वाले 10 हजार लोगों को नौकरी से निकाल दिया गया हैं।

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झारखंड में भी लगभग 200 शोरूम बंद हो गए हैं। वहीं पार्ट्स बनाने वाली कई यूनिट्स ने काम करना बंद कर दिया है। सरकार को जल्द से जल्द इसे दूर करने के लिए कई ठोस कदम उठाने पड़ेंग लेकिन अभी दूर दूर तक इससे निजात मिलने के आसार नहीं दिख रहे हैं।

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