Sunday, Jun 26, 2022
-->
cases registered against law makers not withdrawn high court permission supreme court rkdsnt

कानून निर्माताओं के खिलाफ दर्ज केस हाई कोर्ट की इजाजत के बिना वापस नहीं ले सकते: सुप्रीम कोर्ट

  • Updated on 8/10/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। आपराधिक मामलों का सामना कर रहे नेताओं को प्रभावित करने वाले एक महत्वपूर्ण आदेश में उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को राज्य अभियोजकों की शक्ति को कम कर दिया और कहा कि वे कानून निर्माताओं के विरुद्ध दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के तहत दर्ज अभियोजन को उच्च न्यायालयों की अनुमति के बिना वापस नहीं ले सकते। प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण, जस्टिस विनीत सरन और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने केंद्र सरकार और सीबीआई जैसी एजेंसियों द्वारा स्थिति रिपोर्ट दायर नहीं करने पर नाराजगी जताई तथा संकेत दिया कि नेताओं के विरुद्ध दर्ज मामलों की निगरानी करने के लिए उच्चतम न्यायालय में एक विशेष पीठ की स्थापना की जाएगी। 

पंजाब में उद्योगपतियों की इकाई ने गठित की नई राजनीतिक पार्टी, चढूनी होंगे CM उम्मीदवार 

अदालत की सहायता के लिए नियुक्त न्याय मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया द्वारा खबरों के आधार पर उल्लिखित उन तथ्यों के आलोक में उच्चतम न्यायालय का आदेश महत्वपूर्ण है जिनमें कहा गया था कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों ने सीआरपीसी की धारा 321 के इस्तेमाल से नेताओं के विरुद्ध दर्ज आपराधिक मामलों को वापस लेने का अनुरोध किया था। यह धारा अभियोजकों को मामले वापस लेने की शक्ति देती है। न्याय मित्र की रिपोर्ट में कहा गया था, च्च्उत्तर प्रदेश सरकार संगीत सोम (मेरठ के सरधना से विधायक), सुरेश राणा (थाना भवन से विधायक), कपिल देव (मुजफ्फरनगर सदर से विधायक, जहां दंगे हुए थे) और नेत्री साध्वी प्राची के विरुद्ध अभियोजन वापस लेने का अनुरोध कर रही है।’’  

यूपी जेल में बंद सपा नेता आजम खान, उनके बेटे को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत

न्याय मित्र की रिपोर्ट में अन्य राज्यों में मामले वापस लेने का भी हवाला दिया गया है। पीठ ने कहा, च्च्पहला मुद्दा मामले वापस लेने के लिए सीआरपीसी की धारा 321 के गलत इस्तेमाल का है। हमें यह निर्देश देना उचित लग रहा है कि सांसद और विधायक के विरुद्ध कोई भी अभियोजन उच्च न्यायालय से अनुमति लिए बिना वापस नहीं लिया जा सकता।’’ एक अन्य आदेश में न्यायालय ने कहा कि सांसदों और विधायकों के विरुद्ध मामले की सुनवाई कर रहे विशेष अदालतों के न्यायाधीशों का अगले आदेश तक स्थानांतरण नहीं किया जाएगा। हालांकि, उक्त न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति और मौत जैसे अपवादों में आदेश लागू नहीं होगा। 

चिराग को उनके पिता रामविलास पासवान को आवंटित बंगला खाली करने का निर्देश

उच्चतम न्यायालय ने सभी उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार जनरलों को निर्देश दिया कि वे कानून निर्माताओं के विरुद्ध उन मामलों की जानकारी, एक तय प्रारूप में सौंपें, जिनका निपटारा हो चुका है। पीठ ने उन मामलों का भी विवरण मांगा है जो निचली अदालतों में लंबित हैं। पहले दिए गए आदेश के निर्देशानुसार, स्थिति रिपोर्ट दायर नहीं करने पर नाराजगी जताते हुए पीठ ने कहा कि केंद्र और उसकी एजेंसियों को आदेश का पालन करने का अंतिम अवसर दिया जाता है। इसके साथ ही न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 25 अगस्त की तारीख तय कर दी। 

प्रशांत भूषण ने CJI से पेगासस मामले में सुनवाई का सीधा प्रसारण करने का किया अनुरोध

इस मामले में न्यायालय की मदद के लिये नियुक्त न्याय मित्र की भूमिका निभा रहे वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया और वकील स्नेहा कालिता की रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद पीठ ने आदेश दिया। पीठ, भारतीय जनता पार्टी के नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय द्वारा 2016 में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें सांसदों और विधायकों के विरुद्ध आपराधिक मामलों की त्वरित सुनवाई तथा दोषी ठहराए गए नेताओं को आजीवन चुनाव लडऩे से रोकने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।

comments

.
.
.
.
.