Sunday, Dec 15, 2019
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CAT ने एक नई मिसाल कायम की

  • Updated on 4/29/2019

विदेश में अलग-अलग पदों पर तैनात अधिकारी, जो ड्यूटी के लिए अपने कैडर राज्य को रिपोर्ट नहीं करते हैं, वे स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना या पैंशन के लिए पात्र नहीं हैं, केन्द्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) के आदेश ने यह सीधा एवं स्पष्ट निर्देश दिया है।

ट्रिब्यूनल ने पूर्व वरिष्ठ आई.ए.एस. अधिकारी संजीव सिंह आहलूवालिया के सेवा और पैंशन लाभ से  संबंधित स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के मामले को खारिज कर दिया। आहलूवालिया 1980 बैच के यू.पी. कैडर के अधिकारी हैं। सूत्रों के अनुसार, 2005 में आहलूवालिया वित्त मंत्रालय के विनिवेश विभाग में संयुक्त सचिव के पद पर केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर थे।

उनके अनुरोध पर, प्रतिनियुक्ति की अवधि पूरी होने से पहले उन्हें अपने मूल कैडर में वापस भेज दिया गया था। इसके बाद, बाबू को 18 सितंबर, 2005 और 17 सितम्बर, 2006 के बीच एक वर्ष के लिए सूडान में सेवा करने के लिए विश्व बैंक के असाइनमैंट को स्वीकार करने की अनुमति मिल गई। हालांकि, उन्होंने विदेश में नियुक्ति का अपना एक साल पूरा होने के बाद अपने कैडर राज्य को वापस रिपोर्ट ही नहीं की।

अप्रैल 2010 में, आहलूवालिया ने प्रासंगिक अखिल भारतीय सेवा नियमों की शर्तों के तहत स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की मांग वाला एक आवेदन दे दिया। केन्द्र ने उनके आवेदन को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उन्हें अपनी विदेशी पोसिं्टग के एक वर्ष से अधिक कोई भी एक्सटैंशन नहीं दिया गया था, और फिर भी उन्होंने अपने विदेशी असाइनमैंट की समाप्ति के बाद ड्यूटी पर रिपोर्ट नहीं की।

न्यायाधिकरण ने उल्लेख किया कि आवेदक की अनुपस्थिति की अनधिकृत अवधि छह वर्ष और एक माह थी। यह आगे देखा गया कि यदि सेवा का कोई सदस्य जो पांच साल से अधिक की अवधि के लिए वैध अवकाश पर है, तो उसे स्वत: त्यागपत्र के तौर पर माना जा सकता है। आवेदक, जो छह साल से अनधिकृत  अनुपस्थित है, खुद को उच्च पद पर नहीं रख सकता है।

पी.एम.ओ. में फैली अशांति
ऐसी खबरें हैं कि पी.एम.ओ. से कई नौकरशाहों का मोह भंग हो रहा है। यह पता चला है कि पी.एम.ओ. में कई वरिष्ठ नौकरशाहों ने समय से पहले सेवानिवृत्ति या कुछ अन्य पोसिं्टग में स्थानांतरित करने की मांग की है। इस बारे में जानकारों का कहना है कि अन्य मंत्रालयों में कई अधिकारी ऐसे हैं जो बाहर निकलना चाहते हैं। लगभग सभी मामलों में, पी.एम.ओ. छोडऩे की इच्छा का कारण पी.एम. और सरकारी नीति को नियंत्रित करने वाले सलाहकारों के छोटे समूह के साथ तालमेल की कमी है।

बाबुओं की वरिष्ठता का मामला
तेलंगाना राज्य को आंध्र प्रदेश से अलग हुए लगभग पांच साल हो चुके हैं, लेकिन अभी भी उसको लेकर नौकरशाही से जुड़े अनसुलझे मुद्दे बने हुए हैं। हाल ही में, गृह मंत्रालय (एम.एच.ए.) ने तेलंगाना और आंध्र प्रदेश राज्य पुनर्गठन को लेकर दोनों राज्यों के विभागों के प्रमुखों के परामर्श से जल्द से जल्द पुलिस निरीक्षक (सिविल) की वरिष्ठता सूची में विसंगतियों को हल करने का निर्देश दिया है।

एम.एच.ए. अवर सचिव आर. वेंकटेशन द्वारा भेजे गए एक पत्र में, दोनों राज्यों को फीडर ग्रेड के संबंध में वरिष्ठता विवाद का निपटान करने और इस संबंध में गठित उप-समिति द्वारा तय किए गए अधिकारियों की श्रेणी के आबंटन की सलाह दी गई थी।

माना जाता है कि गृह विभाग के कर्मचारियों, विशेष रूप से निरीक्षकों (सिविल), डी.एस.पी. (सिविल), अतिरिक्त एस.पी. (सिविल) और एस.पी. (गैर-कैडर) की संशोधित वरिष्ठता सूची सहमति सिद्धांतों के खिलाफ थी।   ---दिलीप चेरियन

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख (ब्लाग) में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इसमें सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इसमें दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार पंजाब केसरी समूह के नहीं हैं, तथा नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी समूह) उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

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