Tuesday, Nov 29, 2022
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सौ करोड़ रु में राज्यपाल पद, राज्यसभा सीट की फर्जी पेशकश करने वाले गिरोह का भंडाफोड़

  • Updated on 7/25/2022

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने राज्यसभा सीट और राज्यपाल पद दिलाने का झूठा वादा कर लोगों से कथित तौर पर सौ करोड़ रुपये की ठगी की कोशिश करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ कर इसके चार सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जांच एजेंसी ने इस मामले में हाल ही में दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक में सात स्थानों पर छापेमारी की थी। अधिकारियों ने बताया कि सीबीआई ने महाराष्ट्र के लातूर जिले के रहने वाले कमलाकर प्रेमकुमार बंदगर, कर्नाटक के बेलगाम निवासी रवींद्र वि_ल नाइक और दिल्ली-एनसीआर के रहने वाले महेंद्र पाल अरोड़ा तथा अभिषेक बूरा को गिरफ्तार कर लिया।     

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उन्होंने कहा कि छापेमारी के दौरान मोहम्मद एजाज खान नामक एक आरोपी सीबीआई अधिकारियों पर हमला कर फरार होने में कामयाब रहा। अधिकारियों ने बताया कि फरार आरोपी के खिलाफ जांच एजेंसी के अधिकारियों पर हमला करने के आरोप में स्थानीय थाने में एक अलग प्राथमिकी दर्ज की गई है।  एजेंसी ने मामले के सिलसिले में सभी पांचों आरोपियों को प्राथमिकी में नामजद किया है।  हालांकि, सीबीआई की एक विशेष अदालत ने एजेंसी द्वारा गिरफ्तार किए गए सभी चार लोगों को जमानत दे दी है।

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     प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि बंदगर खुद को एक वरिष्ठ सीबीआई अधिकारी के रूप में पेश करता था और उच्च पदस्थ अधिकारियों के साथ अपने ‘संबंधों’ का हवाला देते हुए बूरा, अरोड़ा, खान और नाइक से कोई भी ऐसा काम लाने को कहता था, जिसे वह भारी-भरकम रकम के एवज में पूरा करवा सके। प्राथमिकी के मुताबिक, आरोपियों ने ‘‘राज्यसभा की सीट दिलवाने, राज्यपाल के रूप में नियुक्ति करवाने और केंद्र सरकार के मंत्रालयों एवं विभागों के अधीन आने वाली विभिन्न सरकारी संस्थाओं का अध्यक्ष बनवाने का झूठा आश्वासन देकर लोगों से भारी-भरकम राशि ऐंठने के गलत इरादे से साजिश रची।’’   

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  इसमें कहा गया है कि सीबीआई को अपने सूत्रों से पता चला कि बूरा ने बंदगर से चर्चा की थी कि कैसे नियुक्तियों में ‘महत्वपूर्ण भूमिका’ निभाने वाले उच्च पदस्थ अधिकारियों के साथ बूरा के कथित संबंधों का इस्तेमाल काम निकलवाने के लिए किया जा सकता है। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि आरोपी सौ करोड़ रुपये के एवज में राज्यसभा की उम्मीदवारी दिलवाने के झूठे वादे के साथ लोगों को ठगने की कोशिशों में जुटे थे।     

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प्राथमिकी के मुताबिक, सीबीआई को सूचना मिली थी कि आरोपी वरिष्ठ नौकरशाहों और राजनीतिक पदाधिकारियों के नाम का इस्तेमाल करेंगे, ताकि किसी काम के लिए उनसे संपर्क करने वाले ग्राहकों को सीधे या फिर अभिषेक बूरा जैसे बिचौलिए के माध्यम से प्रभावित किया जा सके।      प्राथमिकी के अनुसार, यह भी पता चला है कि बंदगर ने खुद को सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी के रूप में पेश किया था और विभिन्न पुलिस थानों के अधिकारियों से अपने परिचित लोगों का काम करने को कहा था तथा विभिन्न मामलों की जांच को प्रभावित करने की कोशिश भी की थी।      

 

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