Saturday, Apr 17, 2021
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CBSE के निर्देश- विवेकानंद जयंती पर राष्ट्रीय युवा दिवस मनाएं स्कूल, Online प्रतियोगिता करें आयोजित

  • Updated on 1/12/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। भारत सरकार स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda) के सम्मान में उनकी जयंती के दिन 12 जनवरी को नेशनल यूथ डे मना रही है। इसका मकसद युवाओं में विवेकानंद के दर्शन और विचारों को प्रचारित करना है। इसी कड़ी में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के अकादमिक निदेशक जोसेफ इमैनुएल ने बोर्ड से मान्यता प्राप्त सभी स्कूलों के प्रिंसिपलों को लिखा है कि वह ऑनलाइन माध्यम से कुछ गतिविधियों का आयोजन करें।

यूथ एज ग्रोथ एंड पीस अम्बेस्डर गतिविधि के अंतर्गत किसी युवा उद्यमी को आमंत्रित कर छात्रों के लिए लेक्चर दिलवाना होगा। जिसके वीडियो को 9वीं से 12वीं तक के छात्रों को भेजा जा सकता है। इसके इतर यूथ डे के दिन युवाओं के साथ काम कर रहे प्रसिद्ध शख्सियतों के लेक्चर भी आयोजित किए जा सकते हैं।

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ऑनलाइन प्रतियोगिता आयोजित करने के निर्देश
ऑनलाइन पेटिंग, कविता लेखन, निबंध लेखन प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जा सकती हैं। देश कई समस्याओं से लड़ रहा है तो युवाओं के बीच एक पैनल डिस्कशन आयोजित किया जाए जिसमें नए तरीके से समस्याओं के हल खोजे जाएं। 

बता दें कि प्रत्येक वर्ष 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस (National Youth Day) के दिन स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda) का जन्म दिन होता है। स्वामीजी का जन्म कोलकाता में 12 जनवरी 1863 को हुआ था। इनका मूल नाम नरेंद्रनाथ था। इनके पिता का नाम विश्वनाथ दत्त और माता का नाम भुवनेश्वरी देवी था। पिता कोलकाता हाईकोर्ट में अटार्नी ऑफ लॉ थे।

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विवेकानंद ने पश्चिमी देशों में वेदांत और योग का किया प्रचार
स्वामी जी कोलकाता के कॉलेज से बी.ए. और लॉ की डिग्री हासिल की थी, लेकिन उनका मन अध्यात्म की ओर ज्यादा था। नरेंद्र नाथ को विवेकानंद नाम उनके गुरु स्वामी रामकृष्ण परमहंस ने दिया था। कहा जाता है कि स्वामीजी की याददाश्त बहुत तेज थी। वे बहुत ही जल्दी पूरी किताब पढ़ लेते थे और किताब की हर बात उन्हें याद रहती थी।

पश्चिमी देशों को वेदांत और योग के बारे में जाग्रत कराने का योगदान स्वामी विवेकानंद को ही जाता है। 19वीं शताब्दी में हिंदू धर्म का प्रचार करके स्वामी विवेकानंद ने इसे एक मुख्य धर्म के रूप में पहचान दिलाई। एक समाज सुधारक के तौर पर स्वामी विवेकानंद ने ‘रामकृष्ण मिशन’ की स्थापना की, जो आज भी अपना काम कर रहा है।

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