center will make big announcement on unauthorized colony

दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनी पर केंद्र करेगा बड़ा ऐलान, दूर होगी मालिकाना हक की समस्या

  • Updated on 9/12/2019

नई दिल्ली/निशांत राघव। दिल्ली (Delhi) की अनधिकृत कॉलोनियों के नियमितिकरण पर केंद्र सरकार (Central government) जल्द ही बड़ा ऐलान कर सकती है। माना जा रहा है कि केंद्र सरकार की इस घोषणा के साथ ही जहां इन कॉलोनियों में रहने वाली करीब 35 फीसदी से अधिक आबादी के लिए लगभग दो दशक से भी अधिक समय से चली आ रही संपत्ति पर मालिकाना हक को लेकर समस्या दूर होगी।

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इस मुद्दे से भाजपा (BJP) आगामी चुनाव में विपक्षी दलों को पटखनी देने की कोशिश भी करेगी। फिलहाल इन कॉलोनियों के सीमांकन का सेटेलाइट मैपिंग के जरिए सर्वे का काम जारी है, जिसे इस माह के अंत तक पूरा कर लेने की संभावना भी जताई गई है। इससे भाजपा को केंद्र सरकार के जरिए एक बड़ा चुनावी मुद्दा मिलने वाला है, वहीं विपक्ष के लिए यह मामला कड़ी टक्कर देने वाला साबित हो सकता है। पिछले दो दशक और उससे पहले से ही दिल्ली विधानसभा चुनावों में अनधिकृत कॉलोनियों के नियमितिकरण का मुद्दा विभिन्न दलों के मेनिफेस्टो का भी हिस्सा रहा है। जीत-हार में भी इस इलाके में रहने वाले लोग महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आए हैं। यही वजह है कि  अब केंद्र सरकार ने इस मामले में पूरी सतर्कता बरतते हुए कदम उठाना शुरू किया है। 

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इन इलाकों में होगा फायदा
सैनिक फार्म, अनंत राम डेयरी, महेंद्रु एंक्लेव, सोनिया विहार, शास्त्री पार्क, बुराड़ी, बवाना,नरेला, किराड़ी,नांगलोई, उत्तम नगर, नूर नगर एक्सटेंशन, जामिया, ओखला, पूंठ कलां, ढिचाऊं रोड, भजनपुरा, करावल नगर, खानपुर विस्तारित क्षेत्र, ईस्ट विनोद नगर, मंगलापुरी, मंगोलपुरी, जहांगीरपुरी, पालम कॉलोनी,बदरपुर,संत नगर, ओखला विहार जामिया नगर, मुंडका, झड़ौदा कलां, घोंडा, सीमापुरी, रनहौला विहार, पालम विहार, मीठापुर, बुद्धविहार, महावीर एंक्लेव, न्यू अशोक नगर, दल्लूपुरा, रिठाला, नवादा मोहन गार्डन आदि इलाकों में हैं कॉलोनियां। 

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एक नजर अब तक की प्रक्रिया पर

  •  दो दशक से भी अधिक समय से राजनीति के कारण अधर में झूलता रहा है मामला 
  •  2012 में दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने बांटे थे 800 कॉलोनियों को प्रॉविजनल सर्टिफिकेट
  •  उस समय कॉलोनियों की संख्या 1639 थी
  •  अब बढ़कर 1797 पहुंच गई है यह संख्या
  •  केंद्र ने विशेष कमेटी के जरिए 90 दिन में कॉलोनियों से जुड़ी रिपोर्ट कराई है तैयार
  •  डीडीए के जरिए सेटेलाइट मैपिंग से हो रहा कॉलोनियों के सीमांकन सर्वे का काम
  •  2014 तक की कॉलोनियों को नियमित करने की योजना पर हो रहा काम
  •  सॢकल रेट के आधार पर न्यूनतम राजस्व शुल्क से नियमित करने की है योजना
  •  सरकारी भूमि, कृषि भूमि व ग्राम सभा की जमीन के आधार पर कॉलोनियों की श्रेणी भी होगी निर्धारित

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