Monday, Dec 06, 2021
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बिजली बिल, सब्सिडी और MPS को लेकर धरने पर बैठे किसानों को सरकार से कितना मिलने की है उम्मीद?

  • Updated on 12/3/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन नए कृषि कानूनों (Farm Bill) के खिलाफ किसानों का आंदोलन (Farmer Protest) आज भी जोर-शोर से जारी है। हालांकि केंद्र सरकार की किसानों होने वाली तीसरी बातचीत जारी है लेकिन किसानों को अभी भी संशय लगा हुआ है।  

दिल्ली के विज्ञान भवन में किसानों की ओर से 40 संगठन के नेताओं के साथ सरकार की बातचीत चल रही है। इससे पहले आज पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। 

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बता दें कि किसानों की पहली मुलाकात में सरकार से उन्हें कोई खास सुनने को नहीं मिला इसके बाद दूसरी मीटिंग में सरकार ने किसानों के लिए एक समिति बनाने की बात कही लेकिन किसानों ने उसे भी स्वीकार नहीं किया। किसान उत्पाद व्यापार व कॉमर्स एक्ट 2020, मूल्य आश्वासन व फार्म सर्विस पर किसान करार एक्ट 2020 और एसेंशियल कमोडिटी (संशोधन) एक्ट 2020 ये तीन कानून पिछले दिनों सरकार ने पास किए हैं।

दरअसल, किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum support price) और मंडी के मुद्दे सरकार पर विश्वास नहीं है इसलिए किसान इन मसलों पर सरकार की कही हुई बात को लिखित में चाहते हैं। उन्हें सरकार से उनके कहे हुए शब्दों को लेकर गारंटी चाहिए। 

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इसके साथ ही किसानों को प्रस्तावित बिजली संशोधन बिल 2020 को भी वापस लेने पर जोर दे रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें इस बिल से खतरा है। उनका कहना है कि उन्हें इसके होने से सब्सिडी वाली बिजली नहीं मिलेगी।

किसान मानते हैं कि अगर वो कमजोर पड़े तो उनका सीधा नुकसान होगा। इस वजह से किसानों की मांग है कि एमसीपी (MSP) को कानून का हिस्सा बनाया जाए। किसानों को इस बात का डर है कि कानून लागू होने के बाद कॉरपोरेट खरीदार अधिक दाम पर फसल ले लेंगे और जब कुछ समय बाद उन पर जब एमएसपी का दबाव नहीं होगा तो वो मनचाहे दामों में फसल खरीदेंगे और तब किसान मजबूर होंगे और उनके पास कोई और विकल्प नहीं बचेगा।

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उधर, मंडी को लेकर भी किसानों में डर बैठा हुआ है कि अगर मंडी के बाहर भी खुले तौर पर फसल खरीदने और बेचने की छूट हो जाएगी तो मंडिया कमजोर पड़ जाएंगी और फिर आगे जाकर उन्हें मंडी बंद करनी पड़ेगी। किसान मानते हैं कि मंडियों का मजबूत होना बेहद जरूरी है क्योंकि तभी वो आड़तियों को फसल बेचकर पैसे कमा लेते हैं लेकिन कॉरपोरेट के साथ ऐसे रिश्ते नहीं बन पाएंगे।

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