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चाणक्य जो आज भी है प्रासंगिक लेकिन मौत... पर से नहीं उठा परदा

  • Updated on 6/19/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। चाणक्य का नाम तो आपने सुना ही होगा। खासकरके जब कभी-भी देश में राजनीतिक हलचल होती है तो कभी अमित शाह को तो कभी शरद पवार को यह तमगा दिया जाता है। आलम तो यह है कि राजनीति और चाणक्य एक सिक्के के ही दो पहलू माने जाते है। उन्होंने ही मोर्य वंश की स्थापना की थी और चंद्रगुप्त को शासक घोषित किया था। राजनीति के धुरंधर चाणक्य भले ही 2300 साल पहले चंद्रगुप्त के सलाहकार थे, लेकिन आज भी प्रासंगिक बने हुए है।

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कभी मगध के राजा घनानंद के अत्याचार के परेशान होकर चाणक्य ने नंद वंश को उखाड़ फेंकने की कशम खाई थी। उस समय घनानंद ने चाणक्य के पिता चणक की हत्या राजद्रोह के आरोप में कर दिया। जिसके बाद चाणक्य ने अपना हुलिया बदला और नाम बदलकर विष्णुगुप्त रख लिया। ताकि उनके सैनिक पहचान नहीं कर सकें। लेकिन उनकी मौत आज भी रहस्यमय बनी हुई है।

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कहा जाता है कि चाणक्य ने अपने जीवन के अंतिम समय में मगध से दूर किसी जंगल में चले गए। जहां उनकी मौत हो गई। दूसरी तरफ मगथ की ही रानी हेलेना ने उन्हें जहर देकर मार दिया था।  तो कोई दावा करता है कि राजा बिंदुसार के मंत्री सुबंधु ने उन्हें जिंदा आग के हवाले कर दिया। जिससे उनकी मौत हो गई। लेकिन आचार्य चाणक्य का जन्म ईसा पूर्व 375 में हुआ था। जबकि मृत्यु ईसा पूर्व 283 में बताया जाता है। खैर जो भी हो लेकिन चाणक्य जैसा दूसरा राजनीतिज्ञ फिर इस धरती पर पैदा नहीं लिया। जब कभी-भी कोई तीसमारखां अपना करामात राजनीति में दिखाता है तो उसकी तुलना ही चाणक्य से की जाती है।  

  

 

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