Friday, Oct 07, 2022
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Chances of withdrawal of agricultural law less DJSGNT

कृषि कानून को वापस लेने के आसार कम, बीच का रास्ता तालाश रही है सरकार

  • Updated on 12/8/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। नए कृषि कानूनों (New Farm laws) के खिलाफ किसानों का विरोध (Farmers Protest) आज 13वें दिन भी लगातार जारी है, वहीं आज यानी 8 दिसंबर को भारत बंद (Bharat bandh) का ऐलान किया गया है। इस बीच सरकारी आला अधिकारियों का मानना है कि सरकार द्वारा नए कानून वापस लेने की संभावनाएं कम ही हैं।

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बीच का रास्ता निकालेगी सरकार
ऐसे में सरकारी अधिकारियों की मानें तो अन्य विकल्पों जैसे कानूनों में कुछ हद तक संशोधन के लिए सरकार तैयार है। इस मुद्दे का हल केवल बातचीत के जरिए निकाला जा सकता है। सरकार की कोशिश है कि कृषि कानून को वापस लेने की जगह बीच का रास्ता निकाला जाए। यदि इससे भी बात नहीं बनती और किसानों का आंदोलन लंबा चलता है तो सरकार उसका सामना करने के लिए भी तैयार है। 

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एमएसपी और खरीद पर लिखित आश्वासन देने को सरकार तैयार
सरकारी अधिकारियों का ये बयान तब आया है जब सरकार ने कानून के कुछ प्रावधानों में संशोधन करने की मांग स्वीकार की है।  सरकार द्वारा किसानों को बताया गया कि वे कानूनों के कुछ प्रावधानों में संशोधन करने, एमएसपी और खरीद पर लिखित आश्वासन देने के लिए तैयार थे, लेकिन किसान प्रतिनिधियों ने तीनों कानूनों को रद्द करने पर जोर दिया।

हुई बैठक
एक वरिष्ठ नेता कहा कहना है कि इन कानूनों का उद्देश्य राजनीति से परे आवश्यक कृषि सुधारों को लाना है। वहीं 9 दिसंबर के दौर की बातचीत की तैयारी करते हुए, रविवार को, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, जोकि किसान वार्ता में सरकार की टीम का नेतृत्व कर रहे हैं, ने अपने दो कर्मियों कैलाश चौधरी और परषोत्तम रूपाला के साथ बैठक की।

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यह सरकार का रुख है
शीर्ष अधिकारी ने कहा कि निश्चित रूप से, हम यह देखने के लिए इंतजार करेंगे कि 9 दिसंबर को किसानों का क्या रुख रहने वाला है। लेकिन हम कोई जल्दबाज़ी में नहीं हैं। अब तक, जो भी कृषि मंत्री (नरेंद्र सिंह तोमर) ने किसानों को बताया है, वह सरकार का रुख है।

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