अहमदाबाद का नाम बदलना आसान नहीं होगा

  • Updated on 11/22/2018

अहमदाबाद का नाम बदल कर कर्णावती रखने के गुजरात सरकार के प्रस्ताव पर इतिहासकारों ने यह कहते हुए रोष जताया है कि एक काल्पनिक शहर के लिए इतिहास के साथ छेड़छाड़ करने का कोई तुक नहीं है।

इतिहासकार प्रो. मार्कण्ड मेहता का कहना है कि ऐतिहासिक दस्तावेजों में कर्णावती का कोई जिक्र नहीं है, अलबत्ता कुछ साहित्यिक कार्यों में इसके नाम का उल्लेख है। मेरुतुंगाचार्य की कविता ‘प्रबंधचिंतामणि’ का हवाला देते हुए मेहता ने कहा कि कविता में जिक्र किया गया है कि 1094 ईस्वी में कर्णदेव वाघेला ने आशावल के भील राजा आशा को हराया तथा एक बस्ती की स्थापना की।

मेहता ने कहा कि मजे की बात यह है कि कविता 1306 ईस्वी में लिखी गई थी और इसमें कर्णावती का जिक्र है। उन्होंने कहा कि 9वीं शताब्दी से लेकर अब तक आशावल बस्ती का जिक्र कई ऐतिहासिक दस्तावेजों तथा पुस्तकों में किया गया है लेकिन कर्णावती का नहीं।

प्रो. मेहता ने कहा कि कर्णावती के मूल तथा उत्थान का जिक्र यहां एक काल्पनिक शहर के तौर पर किया गया है। इतिहास के एक अन्य प्रोफैसर महबूब देसाई ने इस सिद्धांत को सिरे से खारिज कर दिया कि कभी कर्णावती की स्थापना की गई थी।  

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि अहमदाबाद को यूनेस्को की ओर से ‘विरासती शहर’ का दर्जा प्राप्त है और इसका नाम बदलना एक बड़ी चुनौती हो सकती है। उन्होंने कहा कि अहमदाबाद एक ऐसे शहर के तौर पर विश्व समुदाय में लोकप्रिय है, जिसमें इस्लामिक तथा हिन्दू संस्कृतियों का प्राचीन वास्तुकला मिश्रण है।                                                 ---जी रावल

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