Tuesday, Jan 31, 2023
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Chauri Chaura scandal Mahatma Gandhi withdrew the non cooperation movement prshnt

चौरी चौरा कांड: इस दिन महात्मा गांधी ने वापस ले लिया था असहयोग आंदोलन, जानें कारण

  • Updated on 2/4/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर (Gorakhpur) में आज चौरी- चौरा (Chauri Chaura) शताब्दी समारोह का उद्घाटन प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए किया।  पीएम मोदी ने कार्यक्रम की शुरूआत करते हुए वीर शहीदों को नमन किया और उन्हें श्रद्धांजलि दी। वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चौरी-चौरा की घटना पर प्रकाश डाला। प्रदेश की योगी सरकार चौरी-चौरा घटना का शताब्दी समारोह मना रही है।

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दस्तावेजों से हटेगा कांड शब्द
स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी इस घटना को चौरी चौरा कांड के नाम दिया गया है। इस ऐतिहासिक साल में दस्तावेजों में इसका सिर्फ नाम ही नहीं बल्कि तारीख बदलने की भी तैयारी है। इंडियन काउंसिल आफ हिस्टोरिकल रिसर्च (आइसीएचआर) ने इस बदलाव की प्रक्रिया शुरू की है। चौरा चौरा कोई कांड से कांड शब्द को हचाने की तैयारी है। इतिहासकारों की सबसे बड़ी आपत्ति यह है कि चौरा चौरा कोई कांड नहीं था बल्कि सर्वजन का सहज प्रतिरोध था। 

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भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन पर पड़ा था बड़ा असर
ये घटना 1922 की है, उत्तर प्रदेश में गोरखपुर के पास चौकाचौरी का एक कस्बा है जहां 4 फरवरी 1922 को भारतीयों ने ब्रिटिश सरकार की हिंसक कार्रवाई के बदले में एक पुलिस स्टेशन में आग लगा दी थी, जिससे उस पुलिस स्टेशन में छिपे 22 पुलिस कर्मचारी जिन्दा जलकर मार गए थे। इस घटना ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में एक बड़ा असर डाला, इस घटना को इतिहास में चौरीचौरा कांड के नाम से दर्ज किया गया। इस घटना का महात्मा गांधी और उनके असहयोग आंदोलन पर बड़ा असर रहा। इस हिसंक घटना के बाद गांधी जी ने असहयोग आंदोलन वापस लेने का फैसला किया था।

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चौरीचौरा घटना ने बदला आंदोलन का रुख
जानकारों का कहना है कि असहयोग आंदोलन उस समय जीत के कगार पर था लेकिन चौरीचौरा घटना ने आंदोलन का रुख बदल दिया। इस घटना ने गांधी जी पर गहरा असर डाला और इसे वापस ले लिया गया। गांधी जी का सोचना था कि जो क्रांति में विश्वास रखता है वो आंदोलन की सफलता नहीं देखता, वो देखता है कि वे जैसा चाह रहे हैं वैसा हो रहा है या नहीं। गांधी जी कोई भी जीत हिंसा की शर्त पर नहीं चाहते थे।

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स्मारक स्थल के लिए 32 लाख रुपये का बजट
बता दें कि आज से 100 साल पहले ब्रिटिश हुकूमत की दमनकारी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने वाले बलिदानियों की याद में जो स्मारक बनाया गया था वह पर्यटकों और देशप्रेमियों के लिए तीर्थस्थल का रूप ले लेगा।  32 लाख रुपये की लागत से बने इस स्मारक स्थल के जीर्णोद्धार के लिए योगी सरकार ने दो करोड़ रुपये से अधिक का बजट जारी किया है, जिससे शहीद स्मारक अब पर्यटन स्थल के स्वरूप में आ गया है। 

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