Sunday, Feb 28, 2021
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छत्रपति शिवाजी जयंतीः जानें, मुगलों को घुटनों पर लाने वाले वीर नायक का कैसा था जीवन

  • Updated on 2/19/2021

नई दिल्ली/ प्रियंका शर्मा। भारतीय इतिहास में वीर सपूत और मराठा समाज के गौरव छत्रपति शिवाजी महाराज (Chhatrapati Shivaji Maharaj) का 19 फरवरी 2021 को जयंती है। छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती पर हर साल सोभा यात्रा निकाली जाती है, लेकिन इस बार कोरोना वायरस को देखते हुए शोभा यात्रा नहीं निकालने का निर्णय लिया गया है। जयंती समारोह बूढ़ेश्वर मंदिर स्थित सभागृह में संपन्न किया जाएगा। छत्रपति शिवाजी एक महान देशभक्त होने के साथ ही कुशल प्रशासक भी थे। शिवाजी महाराज का जन्म 19 फरवरी 1630 को मराठा परिवार में शिवनेरी दुर्ग में हुआ था। इसके अलावा कुछ लोग उनका जन्म 1627 में भी बताते हैं।

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पिता शाहजी भोसले थे सेनापति
इस साल देशभर में उनकी 391वीं जयंती मनाई जा रही है, शिवाजी के पिता शाहजी भोसले सेना में सेनापति थे और उनकी माता जीजाबाई धार्मिक स्वभाव की थीं। शिवाजी का पालन-पोषण धार्मिक ग्रंथ सुनते सुनते हुआ।

माता जीजाबाई धार्मिक स्वभाव वाली होते हुए भी गुण-स्वभाव और व्यवहार में वीरंगना नारी थीं उनके अंदर बचपन में ही शासक वर्ग की क्रूर नीतियों के खिलाफ लड़ने की ज्वाला जाग गई थी। वहीं दादा कोणदेव के संरक्षण में शिवाजी सभी तरह की सामयिक युद्ध आदि विधाओं में भी निपुण बनाया था।

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1674 में उनका हुआ था राज्याभिषेक
शिवाजी महाराज बहुत वीर थे उनकी बहादुरी के किस्से आज भी लोगों में जोश भर देते हैं। छत्रपति शिवाजी महाराज मराठा थे और, सन (1630-1680) भारत के राजा एवं रणनीतिकार थे जिन्होंने 1674 में पश्चिम भारत में मराठा साम्राज्य की नींव रखी।

सन 1670 में छत्रपति शिवाजी ने मुगलों को हराकर सिंहगढ़ के किले पर अपना परचम लहराया और मुगलों की सेना के साथ जमकर लोहा लिया था। उन्होंने कई साल औरंगजेब के मुगल साम्राज्य से संघर्ष किया। सन 1674 में रायगढ़ में उनका राज्याभिषेक हुआ और छत्रपति बने। शिवाजी ने अपनी सेना और सुसंगठित प्रशासनिक इकाइयों की सहायता से एक योग्य और प्रगतिशील प्रशासन दिया।

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मराठा साम्राज्य की रखी थी नींव
1670 में मुगलों को हराकर सिंहगढ़ के किले पर अपना परचम लहराया था, इसके बाद 1674 में उन्होंने ही पश्चिम भारत में मराठा साम्राज्य की नींव रखी।छत्रपति शिवाजी का वास्तव में सारा संघर्ष औरंगजेब जैसे शासकों और उसकी छत्रछाया में पलने वाले लोगों की कट्टरता और उद्दंडता के विरुद्ध था।  

शिवाजी को भारत के एक महान योद्धा और कुशल रणनीतिकार के रूप में देखा जाता है, शिवाजी ने गोरिल्ला वॉर की एक नई शैली विकसित की थी और राज काज में फारसी की जगह मराठी और संस्कृत को अधिक प्राथमिकता दी थी। उन्होंने मुगलों की ढेर सारी संपत्ति और सैकड़ों घोड़ों पर अपना कब्जा जमा लिया था। बताया जाता है कि 1680 में कुछ बीमारी की वजह से अपनी राजधानी पहाड़ी दुर्ग राजगढ़ में छत्रपति शिवाजी की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद उनके बेटे संभाजी ने राज्य की कमान संभाली थी।

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