Saturday, Jul 31, 2021
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सोशल मीडिया कानून पर चिदंबरम हुए नाराज, कहा- सरकार के इस कदम से हैरान हूं

  • Updated on 11/23/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। केरल (Kerala) में सोशल मीडिया (Social Media) पर अपमानजनक पोस्ट लिखने वालों को पांच साल की सजा का प्रावधान करने वाले कानून बनाए जाने को लेकर विवाद शुरू हो गया है। अब इस कानून पर कांग्रेस (Congress) के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री पी. चिदंबरम (P Chidambaram) ने हैरानी जताई है। चिदंबरम ने ट्वीट कर कहा, 'केरल की एलडीएफ सरकार द्वारा 'सोशल मीडिया पर तथाकथित आपत्तिजनक पोस्ट' करने के कारण 5 साल की सजा सुनकर स्तब्ध हूं।'

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा, 'श्री रमेश चेन्निथला, एलओपी को फंसाने के प्रयास से भी हैरान हूं, एक ऐसे मामले में जहां जांच एजेंसी चार बार क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर चुकी थी।' उन्होंने आगे कहा, 'मेरे मित्र सीताराम येचुरी और सीपीआई-एम इन अत्याचारी फैसलों का बचाव कैसे करेंगे?'

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क्या है इस विवादित अध्यादेश में?
केरल मंत्रिमंडल ने पिछले महीने पुलिस अधिनियम को और प्रभावी बनाने के लिए इसमें धारा 118-ए जोड़ने का फैसला किया था। इसके तहत अगर कोई शख्स सोशल मीडिया के जरिए किसी व्यक्ति की मानहानि या अपमान करने वाली किसी सामग्री का उत्पादन करता है, प्रकाशित करता है या प्रसारित करता है तो उसपर 10 हजार रुपए का जुर्माना या पांच साल की कैद या दोनों हो सकते हैं। मुख्यमंत्री पी विजयन (Pinarayi Vijayan) की अगुवाई वाली एलडीएफ सरकार ने इस कदम का यह कहते हुए बचाव किया था कि इस संशोधन की मंशा महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराध कम करना है। 

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अध्यादेश ने वाम पार्टियों को असहज स्थिति में डाला
येचुरी ने कहा, 'अध्यादेश पर पुनर्विचार किया जाएगा।' उनसे पूछा गया कि क्या 'पुनर्विचार' का मतलब यह है कि अध्यादेश को हल्का किया जाएगा, तो उन्होंने संकेत दिया कि इसका मतलब है कि अध्यादेश को रद्द किया जाएगा। माकपा और भाकपा, देनों के ही सूत्रों ने कहा कि एलडीएफ सरकार इस अध्यादेश को निरस्त होने देगी। सूत्रों ने बताया कि अध्यादेश ने दोनों वाम पार्टियों को असहज स्थिति में डाल दिया है, क्योंकि यह दोनों दलों के सिद्धांतों के विपरीत है।

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केरल सरकार के फैसले से सहमत नहीं माकपा
माकपा का केंद्रीय नेतृत्व केरल सरकार के फैसले से सहमत नहीं है और अध्यादेश को रद्द होने देने के लिए राज्य नेतृत्व पर दबाव डाल रहा है। भाकपा महासचिव डी राजा ने कहा है कि वह अध्यादेश से असहज हैं और पार्टी ने राज्य नेतृत्व को इस बारे में अपनी राय बता दी है। राजा ने कहा, 'हमने अपनी राज्य इकाई से अध्यादेश पर पुनर्विचार करने को कहा है। हमने माकपा नेतृत्व से भी बात की है और दोनों की सहमति है कि अध्यादेश को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता है।'

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