Monday, Jan 21, 2019

आश्रय स्थलों में बच्चे-बच्चियों का  हो रहा मानसिक और शारीरिक शोषण

  • Updated on 1/11/2019

देश भर में बच्चों के आश्रय स्थलों की सुरक्षा व प्रबंधन में घोर अनियमितताओं पर सवाल उठ रहे हैं। बिहार के मुजफ्फरनगर में गत वर्ष एक सैक्स स्कैंडल सामने आने के बाद विभिन्न आश्रयगृहों पर छापेमारी के बाद केंद्रीय महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय ने अनेक आश्रयगृहों को बंद कर दिया है।

मुजफ्फरनगर बालिका गृह का संचालक ब्रजेश ठाकुर बिहार की पूर्व मंत्री मंजू वर्मा का पति है। यहां रहने वाली बच्चियों के अनुसार उन्हें रोज पीटा जाता था, नशीली दवाएं दी जाती थीं व उनसे दुष्कर्म किया जाता था।

एक बच्ची के अनुसार ब्रजेश ठाकुर को बालिका गृह में ‘हंटर वाला अंकल’ कहा जाता था। वह जब उनके कमरों में दाखिल होता तो लड़कियों की रूह कांप जाती। एक किशोरी ने बताया कि उसे रात में नशीली दवाओं का भारी डोज दिया जाता और सुबह जब वह जागती तो उसके निजी अंगों में अत्यधिक दर्द होता और वहां घाव के चिन्ह भी दिखाई देते।

विभिन्न आश्रय स्थलों में लड़के-लड़कियों को संरक्षण के स्थान पर उनसे किए जाने वाले दुव्र्यवहार के चलते ही वहां से बड़ी संख्या में लड़कियां भाग रही हैं जिनके चंद उदाहरण निम्र में दर्ज हैं। 

12 जून, 2018 को करनाल के एक अनाथालय से 2 नाबालिग लड़कियां भाग गईं। इन्हें करनाल प्रशासन ने अनाथालय में भेजा था।

18 अगस्त को जींद में डिफैंस कालोनी के एक बाल आश्रम से 2 नाबालिगाएं फरार हो गईं। अगले दिन दोनों ने अदालत में पेश होकर आश्रम में लौटने से मना कर दिया। दोनों में से एक लड़की ने आश्रम के संचालक पर उससे मारपीट व छेड़छाड़ करने व किसी लड़के से शादी करने का दबाव बनाने और दूसरी ने मारपीट करने व खाना न देने के आरोप लगाए।  

18 अगस्त को बहादुरगढ़ के ‘अपना घर’ आश्रम से 4 किशोरियां भवन की दीवार फांद कर संदिग्ध परिस्थितियों में फरार हो गईं। वे लगभग 10 फुट ऊंची दीवार पर चढ़ कर वहां लगी कंटीली तारों को भी हटाकर नीचे पड़ी भवन निर्माण सामग्री पर कूदीं।   

13 नवम्बर को पाटलीपुत्र थाने के ‘नैट्रोडम स्कूल’ में स्थित आशा किरण शैल्टर होम में से 4 लड़कियां दुपट्टïे का सहारा लेकर ग्राऊंड फ्लोर पर उतरने के बाद वहां से फरार हो गईं। 

3 दिसम्बर को दिल्ली के दिलशाद गार्डन स्थित ‘संस्कार आश्रम फॉर गल्र्स’ में 9 लड़कियों के छत तोड़ कर भागने का मामला सामने आया।  पुलिस के अनुसार इनमें से 6 लड़कियां जी.बी. रोड से छुड़वाई गई थीं। पुलिस को शक है कि ये लड़कियां नेपाल से बहला-फुसलाकर लाई गई थीं और फिर इन्हें जी.बी. रोड के कोठों पर बेच दिया गया था। 

6 दिसम्बर को लड़कियों के होस्टलों में चोरी से कैमरे लगाकर उनके निजी क्षणों और उनकी गतिविधियों के वीडियो तक बनाने का रहस्योद्घाटन हुआ है और  इस सिलसिले में चेन्नई में एक लड़कियोंके होस्टल के संचालक को गिरफ्तार करके पुलिस ने कैमरे भी कब्जे में लिए हैं।

29 दिसम्बर को दिल्ली महिला आयोग ने एक निजी शैल्टर होम में बच्चियों के साथ दुव्र्यवहार के मामले में स्टाफ के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज करवाई। आरोप है कि यहां बच्चियों से काम करवाया जाता था और विरोध करने पर उनको मिर्च खिलाई जाती। इस पर भी वे नहीं मानतीं तो उनके गुप्तांगों में मिर्च पाऊडर डाल दिया जाता था। 

अब 7 जनवरी 2019 को मुजफ्फरपुर शैल्टर होम के मामले में सी.बी.आई. की चार्जशीट में बच्चियों के साथ हुई क्रूरता का पता चला है। इसके अनुसार बच्चियों को ड्रग्स देकर नींद में ही बलात्कार किया जाता था। उन्हें कुर्सी से बांध कर दुष्कर्म किया जाता और अशलील भोजपुरी गीतों पर नाचने को मजबूर किया जाता था।

उक्त तथ्यों को देखते हुए बाल आश्रमों से बच्चियों का गायब होना अकारण नहीं। जहां इसके पीछे आश्रमों के प्रबंधकों की अमानवीयता है वहीं इन आश्रमों में प्रबंधकों द्वारा अधिवासियों पर अत्याचार, उनके मानसिक और शारीरिक शोषण और उन्हें अनिवार्य जीवनोपयोगी सुविधाओं से वंचित रखे जाने के अपराधपूर्ण कृत्यों से भी इंकार नहीं किया जा सकता।

ऐसी स्थिति में अव्यवस्थाओं के आरोप में केवल आश्रय गृहों को बंद करना कोई इलाज नहीं है बल्कि समय-समय पर इनका औचक निरीक्षण करने और इनके दोषी पाए जाने वाले संचालकों को कठोरतम और शिक्षाप्रद दंड देना आवश्यक है ताकि वहां रहने वाले लाचार और मजबूर बच्चे-बच्चियों का जीवन और भविष्य सुरक्षित रह सके।        —विजय कुमार 

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