Monday, Jan 21, 2019

हिमाचल: महिला कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, मिलेगी चाइल्ड केयर लीव

  • Updated on 12/17/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। केन्द्र सरकार के तर्ज पर अब हिमाचल में भी महिला कर्मचारियों को अपने बच्चों की देखभाल के लिए दो साल का अवकाश (चाइल्ड केयर लीव) देने की कवायद तेज हो गई है। राज्य की महिला आयोग ने इस संबंध में प्रदेश की सरकार को प्रस्ताव भेज दिया है। अब सरकार के मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है। राज्य सरकार की मंजूरी मिलने के बाद वहां काम कर रही महिला कर्मचारियों को फायदा मिलने वाला है।

इस प्रस्ताव में कहा गया है कि महिला कर्मचारियों को उनके बच्चे के 18 वर्ष पूरे होने तक उन्हें 730 दिनों की छुट्टी दी जाए। इस प्रस्ताव के सिरे चढ़ने तक राज्य की हजारों महिलाओं को लाभ होगा। बता दे यह छुट्टियां महिलाएं  बच्चों के 18 साल का होने के बीच उनके पालन-पोषण, परीक्षा तैयारी और अन्य कार्यों के लिए 730 दिन की छुट्टी ले सकेंगी।

लोकसभा में तीन तलाक संबंधी विधेयक पेश, विपक्ष ने जमकर किया हंगामा

मालूम हो कि, मौजूदा समय में केंद्र सरकार ने महिला कर्मचारियों को दो बच्चों की देखभाल के लिए 730 दिन की छुट्टी का प्रावधान है। केंद्र ने इसे सितंबर 2010 से लागू कर दिया था लेकिन अभी तक देश के कई राज्य हैं जहां काम कर रही महिला कर्मचारियों को इस लाभ से वंचित रखा गया था। इनमें से हिमाचल भी ऐसा ही राज्य हैं जहां महिलाएं चाइल्ड केयर लीव सुविधा से वंचित हैं।

फिलहाल अभी हिमाचल में महिला कर्मियों को वर्तमान में दो बच्चों तक मातृत्व अवकाश का प्रावधान है। राज्य में हर एक बच्चे के जन्म पर महिलाओं को 180 दिन की छुट्टी दी जाती है। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. डेजी ठाकुर ने बताया कि केंद्र सरकार महिला कर्मचारियों को चाइल्ड केयर लीव दे रही है, लेकिन प्रदेश की महिला कर्मचारी अभी तक इससे वंचित हैं।

जानें, तीन राज्यों में मुख्यमंत्री के रूप में विराजमान होने वाले कौन हैं ये धुरंधर

इसीलिए आयोग ने सरकार को प्रस्ताव भेजा है। महिला आयोग के प्रस्ताव के सिरे चढ़ने पर महिला कर्मचारी दो बच्चों के पालन-पोषण और उनकी परीक्षा की तैयारियों के समय इस अवकाश की हकदार होंगी।

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।
comments

.
.
.
.
.