Wednesday, Apr 14, 2021
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बिना जानकारी महिला कैदियों के बच्चों को छात्रावास में रखा जा रहा है: एनसीपीसीआर

  • Updated on 4/6/2021

नई दिल्ली, 6 अप्रैल (अनामिका सिंह): राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने भारत में महिला कैदियों के बच्चों की शैक्षिक स्थिति पर एक अध्ययन रिपोर्ट को मंगलवार को सार्वजनिक किया है। जिसमें बच्चों की कई समस्याओं के बीच बाइबल से संबंधित एक सूची भी दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली में प्रायोगिक अध्ययन का संचालन करते समय आयोग को मौजूदा जेल प्रबंधन प्रणाली में कई चूक देखने को मिली है। जिनमें बच्चों को बाल कल्याण समिति, जिला कलेक्ट्रेट, या सामाजिक कल्याण विभाग के उचित आदेशों के बिना छात्रावासों में रखा जाता है, जो इन बच्चों की सुरक्षा और सुरक्षा से समझौता करता है।

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एनसीपीसीआर का कहना है कि सर्वे के दौरान उन्होंने जानने की कोशिश की कि जेल प्रशासन द्वारा महिला कैदियों के बच्चों को अर्ली चाइल्डहुड एंड अर्ली एजुकेशन (ईसीसीई) कार्यक्रम प्रदान करने के लिए उपलब्ध व्यवस्थाओं का अध्ययन किया जा रहा है या नहीं। साथ ही यह भी मूल्यांकन किया गया कि बच्चों के मौलिक अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए सरकारी अधिकारियों, गैर-सरकारी संगठनों और अन्य संबंधित संस्थानों द्वारा समग्र उपाय क्या किए जा रहे हैं व उनकी शिक्षा की स्थिति क्या है। एनसीपीसीआर का कहना है कि इस दौरान जहां बच्चों को छात्रावास में रखने की बात सामने आई।

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वहीं लखनऊ के नारी बंदी निकेतन के जेल प्रशासन ने एक गैर सरकारी संगठन को धर्म से जुडी जानकारी देने की अनुमति दी है। यही नहीं शोधकर्ताओं को क्रेच सुविधाओं में बाइबिल का ढेर मिला। वहीं दिल्ली में किए गए पायलट अध्ययन के दौरान पाया गया कि लखनऊ के नारी बंदी निकेतन में काम करने वाले एक ही गैर सरकारी संगठन ने आशा सदन के नाम से नोएडा, उत्तर प्रदेश में एक पंजीकृत बाल गृह चला रहा है, जहाँ तिहाड़, मंडोली की महिला कैदियों के बच्चे हैं जोकि एक बडी लापरवाही है।

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आखिर क्यों नहीं है बच्चे परिवार के साथ
एनसीपीसीआर का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुसार 6 वर्ष की आयु से अधिक के बच्चे अपने अभिभावकों के साथ पारिवारिक माहौल में रहते हैं तो उन्हें छात्रावास में क्यों रखा गया है। यदि वो परिवार से वंचित हैं तो जेल अधीक्षक की जिम्मेदारी है कि वो सिर्फ उन्हें समाज कल्याण निदेशालय को सूचित कर समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित होम में रखें। इन मामलों में बाल कल्याण समिति नोडल प्राधिकरण के रूप में नियुक्त होती है।

 

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