Wednesday, Mar 03, 2021
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चीन आगे बढ़ चुका है और उसे परवाह नहीं कि दुनिया उसके बारे में क्या कहती है- RSS प्रमुख मोहन भागवत

  • Updated on 12/3/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने ग्लोबल पर्सपेक्टिव में भारत की भूमिका पर बोलते हुए चीन पर हमला किया है। उन्होंने कहा है कि भारत दुनिया को अपना पूरा एक परिवार मनाता है जबकि दूसरे देश इसे सिर्फ एक बाजार मानते हैं।

उन्होंने कहा कि दुनिया भारत को उम्मीद भरी नजर से देखती है। आरएसएस प्रमुख ने कहा कि भारत दुनिया की अगुवाई कर सकता है वो इसमें काबिल है इसलिए लोग भारत की तरफ देखते हैं। उन्होंने कहा कि भारत में जितनी विविधता है, उतनी कहीं नहीं है। इसी को अखंडता में एकता कहा गया है।

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भारत से है दुनिया को उम्मीद
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि भारत के पास दुनिया के सभी प्रश्नों का उत्तर है। भारत के पास ही सिर्फ विविधताओं को जोड़ने वाला तत्व है और इसे भारत समस्त विश्व को देना चाहता है। भारत की सोच हमेशा से ही ‘सभी को सुख मिले’ वाली रही है। भारत ने कभी भी किसी को छोटा नहीं माना है। यही सोच भारत दुनिया को देना चाहता है। इसी सोच में ही विकास रहेगा, पर्यावरण की सुरक्षा रहेगी और व्यक्ति अधिकार से भरा रहेगा साथ ही समाज भी सच्चे अर्थ में मजबूती आएगी।

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चीन को लेकर कही ये बात
इस दौरान उन्होंने चीन की भूमिका को लेकर कहा, चीन दुनिया की एक बड़ी आर्थिक शक्ति बन गया है और वो अपने प्रभाव को बढ़ाता जा रहा है। चीन सभी बातों का इस्तेमाल सिर्फ अपने विस्तार को बढ़ाने के लिए ही करता है। दुनिया उसके बारे में क्या सोचती है इसका उसपर कोई फर्क नहीं पड़ता और न ही चीन को इससे कोई मतलब है। वो सिर्फ अपना काम करता रहा है और धीरज के साथ आगे बढ़ता रहता है। यही उसका नेचर है हालांकि इससे कई सवाल भी उठते हैं लेकिन वो इनके जवाब देने में भी अपन समय बर्बाद नहीं करना चाहता है।

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रूस को भी लिया निशाने पर
वहीँ, रूस के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि अब रूस भी अपना खेल खेलने में लगा है। वो पश्चिम को दबाकर अपने आपको आगे रखने की कोशिश में लगा हुआ है। इस पूरे खेल में मध्य पूर्व में जो देश हैं उनमें खलबली मची हुई है। जिसका असर दुनिया पर हो रहा है। दुनिया देख रही है कि कैसे सांप्रदायिक कट्टरता फिर से सिर उठा रही है। इसके आगे जाकर होने वाले असर से दुनिया की विविधता, विश्व शांति, जनतांत्रिक व्यवस्था और विश्व की सुंदरता खत्म होने के कगार पर है। इससे पर्यावरण की हानि का एक बहुत बड़ा सवाल सामने है।

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