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china is challenging the whole of asia and america by provoking neighbors musrnt

पड़ोसियों को उकसाकर पूरी एशिया और अमेरिका को चुनौती दे रहा है चीन

  • Updated on 6/27/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। गलवान में जिस दिन भारत और चीनी सैनिकों के बीच खूनी झड़प हुई, उसी सप्ताह चीनी नौसेना की एक पनडुब्बी जापन के नजदीक समुद्र में घुसपैठ कर रही थी। चीन के लड़ाकू जेट जिन में कम से कम एक बमवर्षक भी था, ने ताइवान के एयर स्पेस में उड़ान भरी।

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दुुनिया का ध्यान कोरोना वायरस महामारी से हटाने के लिए चीन की सेना इन गर्मियों में पड़ोसी देशों की सीमाओं में कई बार घुसपैठ कर चुकी है। वह एक तरह से वह नए खतरे पैदा कर पूरी एशिया और अमरीका को चुनौती दे रहा है।  कोरोना महामारी पर अमरीका उसे घेर रहा है। हांगकांग और अन्य मुद्दे ऐसे हैं, जिन्हें चीन अपने राष्ट्रीय गौरव से जोड़ता है। वह दावा करता है कि उसके सभी कदम रक्षात्मक है, मगर उसका हर ऐसा कदम नए सैन्य टकरावों को न्यौता दे रहा है। 

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15 जून की घटना की वजह चीन
फर्स्ट पोस्ट ने न्यूर्याक टाइम्स के हवाले से दी रिपोर्ट में कहा है कि चीन की हरकतों का नतीजा 15 जून की घटना है। यह 1967 के बाद दोनों देशों के बीच सबसे खूनी झड़प है। चीनी विश्लेषकों, भारतीय मीडिया और अमरीकी इंटेलिजैंस की रिपोर्ट इसमें कुछ चीनी सैनिक भी मारे गए, जिनकी संख्या नहीं बताई गई।

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नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर साउथ चाइना सी स्टडीज के अध्यक्ष वू शीकुन ने इस सप्ताह बीजिंग में एक कान्फ्रेंस में कहा कि क्षेत्र में अमरीकी सेना की गतिविधियां हैं और किसी युद्ध के खतरे की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।  

सैन्य ताकत बढ़ा रहा चीन
आस्ट्रेलिया के एक शोध संस्थान चाइना पोलिसी सेंटर के डायरेक्टर एडम नी के अनुसार चीन अन्य क्षेत्रीय ताकतों की तुलना में अपनी शक्ति ज्यादा तेजी से बढ़ा रहा है। इसी वजह से वह इतना अधिक आक्रामक रवैया अपना रहा है। सेना आधुनिक संसाधन और साइबर हथियारों का इस्तेमाल भी हवा और समुद्र में अपनी ताकत बढ़ाने के लिए कर रहा है। चीन के प्रधानमंत्री ली केकियांग ने पिछले महीने ही घोषणा की थी कि इस साल सैन्य बजट 6.6 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है। यह 180 अरब डॉलर तक हो सकता है। यह अमरीका के कुल रक्षा बजट का एक चौथाई है।

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ताइवान का मामला
चीन ने ताइवान के नजदीक एक द्वीप में अपनी पसंद के तसाइ इंग-वेन को स्वयंभू राष्ट्रपति बनवाकर वहां अपनी सैन्य गतिविधियां शुरू कर दी हैं। अप्रैल में चीन का एक विमान वाहक पोत पांच युद्धपोतों के साथ ताइवान के पूर्वी तट के पास पहुंच गया था। यह माना जा रहा है कि ताइवन के संरक्षण वाले द्वीप समूह जिन्हें मैंडरीन और डोंगशा के नाम से जाना जाता है पर चीन सैन्य अभियानों से अपना प्रभुत्व कायम करना चाहता है। 

समुद्र में दादागीरी
दक्षिणी चीन सागर में भी चीन अपना दावा बढ़ाचढ़ा करने लगा है। 2018 के बाद पहली बार पिछले सप्ताह चीनकी पनडुब्बी को पूर्वी चीन सागर में भी गश्त करते पाया गया। तब जापानी युद्धपोत ने उस परमाणु पनडुब्बी को सतह पर आने को विवश किया। 


 

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