Saturday, Apr 17, 2021
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चीन के इस दुर्लभ जीव का मांस है 1 लाख रु. किलो, बढ़ती डिमांड के कारण विलुप्त होने को है ये जीव

  • Updated on 5/20/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। चीन ने दुनिया को न सिर्फ महामारियां दी हैं बल्कि चीन के जीव-जंतुओं को खाने की आदत ने कई जंतुओं को उनके विलुप्त होने के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है।

चीन ने एक ऐसे ही जीवित जीवाश्म कहे जाने वाले जीव को दुनिया से गायब हो जाने वाले जीवों की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया है।

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चीन का अनोखा जीव
इस जीव को चाइनीज जायंट सैलामैंडर के नाम से जाना जाता है। ये एक अनोखा और बेहद कम पाया जाने वाला दुर्लभ जीव है। ये चीन के अलावा उत्तरी अमेरिका और जापान में भी पाया जाता है। लेकिन इस प्रजाति का सबसे बड़ा सैलामैंडर चीन में होता है।

करोड़ो साल पुराना इतिहास
इसका इतिहास 17 करोड़ साल पुराना है और ऐसा मानना है कि ये डायनासोर की प्रजाति का विकसित रूप हैं। बताया जाता है कि चीन में सबसे पहले 1970 में इस सैलामैंडर को खाना शुरू किया गया। यह चीनी लोगों को इतना पसंद आया कि ये तेजी से गायब खरीदी-बेचीं जाने लगी।

डिमांड के साथ ही इसकी खपत बढ़ने लगी और इसका दाम बढ़कर 1 लाख के करीब हो गया। हालात ऐसे भी हुए कि इस एक जायंट सैलामैंडर का दो किलो मांस 1500 डॉलर यानी 1.13 लाख रुपए का मिलने लगा।

विलुप्त होने की कगार पर
वहीँ, अब इसकी प्रजाति जब लगभग खत्म हो चुकी है तब चीन में इसके फार्म हाउस खोले गये हैं, जहां इसका उत्पादन किया जा रहा है। ये चीनी सैलामैंडर एकलौता ऐसा जीव है जो उभयचर होते हुए भी अपनी पूरी जिदंगी पानी के अंदर बिताता है। जबकि, इसके गिल्स नहीं होते।

इंसान जितना बड़ा कद
इसकी विशेषताओं के बारे में बात करें तो चीनी जायंट सैलामैंडर करीब 5।90 फीट तक यानी एक इंसान के बराबर लंबा हो सकता है। जबकि अमेरिका में पाया जाने वाला सैलामैंडर 28 इंच का होता है और जापान का सैलामैंडर चीन से थोड़ा छोटा होता है।

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दवाओं में भी इस्तेमाल
चीनी लोग इस सैलामैंडर को सिर्फ खाते ही नहीं है बल्कि वो इसे दवाओं में भी इस्तेमाल करते हैं। खास कर पहाड़ों की नदियों में पाए जाने वाले इन जीवों की पुरानी आयुर्वेदिक दवाएं बनाई जाती हैं। इसक तेल भी निकाला जाता है।

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