Monday, Dec 05, 2022
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शहरी गैस वितरण में मेघा इंजीनियरिंग को 15, अडाणी टोटल को 14 लाइसेंस 

  • Updated on 1/14/2022

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर्स लिमिटेड (एमईआईएल) को सीएनजी स्टेशन लगाने और पाइप के जरिये रसोई गैस की आपूॢत के सर्वाधिक 15 लाइसेंस जबकि फ्रांसीसी कंपनी के साथ बने अडाणी समूह के संयुक्त उद्यम को 14 लाइसेंस मिलेंगे। शहरी गैस वितरण (सीजीडी) निविदा के 11वें दौर के लिए लगी बोलियां खुलने के बाद आए नतीजों के मुताबिक, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) के पास नौ लाइसेंस जबकि भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) के हिस्से में छह लाइसेंस आए हैं। 

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इसी तरह असम गैस कंपनी तीन लाइसेंस पाने में सफल रही है जबकि दिनेश इंजीनियर्स लिमिटेड ने चार भौगोलिक क्षेत्रों में गैस वितरण के अधिकार हासिल किए है। इनके अलावा हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल), थिंक गैस डिस्ट्रीब्यूशन प्राइवेट लिमिटेड, आईआरएम एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड, इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड और शोलागैस्को प्राइवेट लिमिटेड के भी हिस्से में एक-एक लाइसेंस मिलने वाले हैं। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियमाक बोर्ड (पीएनजीआरबी) के एक अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि शहरी गैस वितरण के 11वें दौर के लिए लगाई गई बोलियां खोली जा चुकी हैं और शुरुआती विजेताओं के नाम सामने आ चुके हैं। हालांकि बोलीकर्ताओं की तरफ से पेश कागजात की पुष्टि के बाद अगले कुछ दिनों में ही इसकी औपचारिक घोषणा की जाएगी। 

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इस दौर की निविदा में 65 भौगोलिक क्षेत्रों की पेशकश की गई थी जिनमें से 61 क्षेत्रों के लिए बोलियां मिलीं। आईओसी ने 53 क्षेत्रों के लिए बोलियां लगाई थीं जबकि अडाणी टोटल गैस लिमिटेड ने 52 क्षेत्रों के लिए दावेदारी पेश की थी। अडाणी समूह ने पहले आईओसी के साथ ही एक शहरी गैस वितरण उद्यम बनाया था लेकिन बाद में उसने टोटल के साथ गठजोड़ कर लिया। इस दौर की निविदा में अडाणी और आईओसी ने मिलकर कोई भी बोली नहीं लगाई थी।      इस दौर में जम्मू, नागपुर, पठानकोट और मदुरै समेत 65 इलाकों के लिए बोलियां आमंत्रित की गई थीं। लेकिन छत्तीसगढ़ के चार इलाकों के लिए एक भी बोली नहीं आई। 

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एमईआईएल को लगाई गई बोलियों के अनुपात में 24.6 फीसदी सफलता मिली है जबकि अडाणी टोटाल गैस लिमिटेड की सफलता दर 23 फीसदी रही है। आईओसी के मामले में कामयाबी की दर 14.8 फीसदी और बीपीसीएल के लिए यह 9.8 फीसदी रही है। टॉरेंट गैस एक भी क्षेत्र में बोली नहीं जीत पाई है।      पीएनजीआरबी ने पिछले महीने कहा था कि इन नए भौगोलिक क्षेत्रों में शहरी गैस वितरण का ढांचा खड़ा करने में करीब 80,000 करोड़ रुपये का निवेश होने की संभावना है। ये इलाके 19 राज्यों के 215 जिलों में स्थित हैं। 

अडाणी विल्मर ने आईपीओ का आकार घटाया 
खाद्य तेल कंपनी अडाणी विल्मर लिमिटेड (एडब्ल्यूएल) ने शुक्रवार को कहा कि उसने अपनी आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) के आकार को 4,500 करोड़ रुपये से घटाकर 3,600 करोड़ रुपये कर दिया है। एक बयान के मुताबिक फॉच्र्यून ब्रांड के तहत खाद्य तेल बेचने वाली कंपनी का आईपीओ इस महीने आने की उम्मीद है। एडब्ल्यूएल अहमदाबाद स्थित अडाणी समूह और सिंगापुर के विल्मर समूह की संयुक्त उद्यम कंपनी है। दोनों की इसमें हिस्सेदारी 50:50 है। आईपीओ के तहत अब 3,600 करोड़ रुपये के इक्विटी शेयरों का एक ताजा निर्गम शामिल होगा और कोई बिक्री पेशकश नहीं होगी। 

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इससे पहले विविरण पुस्तिका (रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस) के मुताबिक आईपीओ के तहत 4,500 करोड़ रुपये जुटाने थे। आईपीओ से मिली राशि में से 1,900 करोड़ रुपये का इस्तेमाल पूंजीगत व्यय के लिए किया जाएगा। कर्ज चुकाने के लिए 1,100 करोड़ रुपये और रणनीतिक अधिग्रहण तथा निवेश के वित्तपोषण के लिए 500 करोड़ रुपये का इस्तेमाल होगा। इस बारे में पुष्टि करने के लिए संपर्क करने पर कंपनी के प्रवक्ता ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

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