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उत्तराखंड : केदारनाथ में फिर से मंडरा रहे हैं खतरे के बादल

  • Updated on 6/28/2019

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल।  2013 में केदारनाथ (Kedarnath) में विनाश की मुख्य भूमिका निभाने वालि चोराबाड़ी झील (Chorabari Lake) में दोबारा पानी इकट्ठा होने लगा है। स्पेस से सेटेलाइट तस्वीरों के जरिए पता चला है कि इस झील में पानी की मात्रा एक बार फिर भरने लगा है। अगर सूचनाओं की मानें तो केदारनाथ में 2013 की तरह तबाही का खतरा फिर से निकट आ रहा है। 

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यह कहती हैं तस्वीरे
सह तस्वीरें लैंडसैट 8 और सेंटीनेल-2B सेटेलाइट से 26 जून, 2019 को ली गई हैं। इन तस्वीरें के मुताबिक पिछले एक महीने में जल समूहों की संख्या दो से बढ़कर चार हो गई है। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि उत्तराखंड सरकार ने एहतियाती उपाय शुरु कर दिए है।

 

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जेएनयू के प्रोफेर ने जताई चिंता
जेएनयू में प्रोफेसर एपी डिमरी इस विषय पर काफी समय से रिसर्च कर रहे है। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि  'केदारनाथ घाटी भूकंप और पारिस्थितिकी की नजर से बहुत संवेदनशील और कमजोर है। 2013 में मानसून जल्दी आने और बर्फ पिघलने की वजह से विध्वंसक बाढ़ आ गई थी। अगर इस तरह जल समूह वहां पर फिर से पनप रहे हैं तो यह बहुत चिंता की बात है।' 

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केदारनाथ से चार किमी ऊपर है चोराबाड़ी
वाडिया संस्थान (Wadia Institute of Himalayan Geology) के वैज्ञानिकों ने चोराबाड़ी व ग्लेशियर क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण कर केदारनाथ मंदिर व केदारपुरी से किसी भी प्रकार के खतरे से इंकार किया है। वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान देहरादून के वरिष्ठ भू-वैज्ञानिक डीपी डोभाल के नेतृत्व में नौ सदस्यीय टीम ने केदारनाथ से चार किमी ऊपर चोराबाड़ी और उससे तीन किमी ऊपर ग्लेशियर क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया है।

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क्या हुआ था छह साल पहले?
2013 में 13 जून से लेकर 17 जून के बीच उत्तराखंड राज्य में काफी बारिश  होने के कारण भयंकर बाढ़ का सामना करना पड़ा। दरअसल यह बारिश मॅानसून के दिनों में होने वाली आम बारिशों से काफी ज्यादा थी, जिससे चौराबाड़ी ग्लेशियर पिघल गया था। ग्लेशियर पिघलने से मंदाकिनी नदी (Eruption in Mandakini river) उफान पर आ गई थी। 

यह हिस्से हुए प्रभीवित 
ग्लेशियकर पिघलने से उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) और पश्चिम नेपाल (West Nepal) के एक बड़े हिस्से को प्रभावित किया था। तेज बारीश होने के कारण सबसे ज्यादा तबाही केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और हेमकुंड साहिब जैसे धार्मिक स्थलों पर हुई। 

 

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