Wednesday, Jul 24, 2019

मध्यप्रदेश: कांग्रेस की जीत पर किसके सिर सजेगा ताज, इनमें है टक्कर

  • Updated on 12/11/2018

नई दिल्ली/ अमरदीप शर्मा। मध्यप्रदेश में सियासी रण अपने अंतिम चरम पर है। वाद-विवादों, रैलियों, भाषणों के महाकुंभ से गुजरता हुआ एमपी विधानसभा का चुनावी रथ मंगलवार को अपने अंतिम चरम पर पहुंच जाएगा। इसमें फैसला हो जाएगा कि रैलियों में अपनी जीत का दम भरने वालों में से किसके सिर जीत का सेहरा सजेगा। हालांकि एक बात तो साफ नजर आ रही है कि भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस में से ही किसी को जीत नसीब होने वाली है। राज्य में किसी अन्य दल के लिए कोई गुंजाइश नहीं बची हुई है। खैर फिलहाल 24 घंटे से भी कम का वक्त बचा हुआ है नेताओं के चेहरों की मुस्कान निखरने और बिखरने में। 

प्रदेश में दोनो ही पार्टियों के बीच कांटे की टक्कर बताई जा रही है। फिलहाल इस बात का अंदाजा लगाना शायद मुश्किल होगा कि आखिर मध्यप्रदेश का बाजीगर कौन है। शिवराज सिंह चौहन पिछले 15 साल से भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व सत्ता के सिंहासन पर काबिज हैं। अगर प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनती है तो शायद इस बात में कोई शक नहीं है कि पार्टी हाई कमान शिवराज सिंह चौहान का ही राजतिलक करेंगी। हालांकि सवाल ये बड़ा है कि अगर कांग्रेस अपना बनवास खत्म करती है तो कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी प्रदेश का जिम्मा किस के कंधों पर सौंपेगे। अगर हम अनुमानित करें तो पार्टी की और से तीन बड़े नाम हैं जो सीएम का चेहरा हो सकते हैं।


कमल नाथ

कमल नाथ कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में शुमार हैं। इसके साथ ही मध्यप्रदेश में कांग्रेस अध्यक्ष भी हैं। इस बार पार्टी ने उनके ही नेतृत्व में चुनाव लड़ा है और शायद पहली बार जीत की दहलीज तक पहुंचती हुई नजर आ रही है। कमलनाश ने अपने राजनैतिक करियर में तमाम मुकाम हांसिल किए हैं। फिलहाल वे मध्यप्रदेश की छिंदवाड़ा लोकसभा सीट से सांसद है। इसके अलवा पूर्व में वे शहरी विकास मंत्री का कार्यभार संभाल चुके हैं। फिलहाल वे अपने सीएम बनने को लेकर चुप्पी साधे हुए हैं लेकिन संभावनाएं की रेस में वे सबसे आगे हैं। कमलनाथ से सीएम बनने के विषय में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि कल तक का इंतजार करिए सब कुछ साफ हो जाएगा। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस 140 से ज्यादा सीटों पर जीत दर्ज करेगी।

ज्योतिरादित्य माधवराव सिंधिया

ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस की ओर से मध्यप्रदेश में युवा लोकप्रिय चेहरा के रुप में उभरे हैं। फिलहाल वे मध्य प्रदेश स्थित के गुना संसदीय क्षेत्र से सांसद हैं। इससे पहले वे मनमोहन सरकार में वाणिज्य एवं उद्योग राज्यमंत्री भी रह चुके हैं। खास बात ये है कि वे माधवराव सिन्धिया के पुत्र हैं जिन्होंने 9 बार लोकसबा के चुनाव जीतकर संसद भवन में जगह बनाई थी। साथ ही एक बार उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी को भारी बहुमतों से हराया था। इसी तरह ज्योतिरादित्य  सिंधिया भी कांग्रेस की ओर से नामी चेहरों में से एक माने जाते हैं साथ ही वे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के करीबी माने जाते हैं। इस लिहाज से देखा जाए तो सीएम की रेस में उनकी दावेदारी भी किसी से कम नहीं है। फिलहाल उन्होंने भी खुद को सीएम का दावेदार बताने से किनारा करते हुए कहा कि यदि कांग्रेस जीतती है तो क्या वह खुद को मुख्यमंत्री पद का प्रबल दावेदार मानते हैं, सिंधिया ने कहा था कि वह ऐसे सवालों का जवाब नहीं देना चाहते। गुना से सांसद सिंधिया ने कहा कि उन्होंने लगातार कहा है कि समूची कांग्रेस का लक्ष्य मध्य प्रदेश में भाजपा को सत्ता से बेदखल करना रहा है। 


दिग्विजय सिंह

दिग्विजय सिंह को कांग्रेस की राजनीति का एक अहम हिस्सा मााना जाता है। पार्टी में उनकी पहचान एक वरिष्ठ नेता के तौर पर है। इसके अलावा वे कई बार अपने बेतुके बयानों को लेकर भी काफी चर्चा में रहते आए हैं। वर्तमान में काग्रेस पार्टी में महासचिव के पद पर है। इसके साथ ही उन्हें मध्यप्रदेश की सियासत का काफी ज्यादा अंदाजा है वे लगातार 2 बार मतलब 10 साल प्रदेश की सत्ता को संभाल चुके हैं। जिसके चलते इस बात में भी कोई दोहराय नहीं है कि अगर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनती है तो वे पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री का ताज पहन सकते हैं। वे कई बार लोकसभा के सदस्य ह चुके हैं। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री का भी कार्यभार संभाल चुके हैं। 

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