Wednesday, Feb 19, 2020
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जानिए, इंजीनियर बनने का सपना देखने वाले हेमंत सोरेन कैसे बने झारखंड के 11वें CM

  • Updated on 12/30/2019

नई दिल्ली/ सोहित शर्मा। झारखंड (Jharkhand) भारत का एक ऐसा राज्य है,जहां प्राकृतिक संसाधनों व जैविक विविधताओं का भंडार है। राज्य के विधानसभा चुनाव में महागठबंधन ने बीजेपी (BJP) को सत्ता से हटा दिया है। राजनीति में एक नए युग की शुरूआत करते हुए हेमंत सोरेन (Hemant Soren ) ने राज्य के 11वें मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण कर ली है।

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सीएम सोरेन बनना चाहते थे इंजीनियर
राज्य के मगढ़ जिले में स्थित नेमरा गांव में 10 अगस्त,1975 को उनका जन्म हुआ। सोरेन का सपना बचपन से ही इंजीनियर बनने का था। उन्होंने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए मकैनिकल इंजिनियरिंग में दाखिला भी लिया और पढ़ाई शुरू की उसी दौरान दुरभाग्य से उनके भाई की मौत हो गई। जिसके बाद उन्हें पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी। कुछ समय उपरांत उन्होंने राजनीति में कदम रखा। साल 2005 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने दुमका सीट से चुनाव लड़ा और यहां उन्हें पार्टी के बागी नेता स्टीफन के हाथों हार का सामना करना पड़ा। इसी बीच उन्होंने अपनी जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव देखे।

इस वजह से झारखंड के सीएम को करना पड़ा हार का सामना

विपरीत परिस्थितियों में नहीं खोया धैर्य
एक समय उनके जीवन में ऐसा भी आया जब पिता शिबू सोरेन को चिरुडीह हत्याकांड में दोषी ठहरा दिया गया। उस दौरान शिबू के पास कोई विकल्प नहीं था और उन्होंने हेमंत को अपना उत्तराधिकारी बनया। हेंमत राज्यसभा में बतौर सांसद 24जून, 2009 से 4 जनवरी,2010 तक रहे। वह बीजेपी/जेएमएम/जेडीयू/एजेएसयू गठबंधन की अर्जुन मुंडा सरकार में राज्य के उपमुख्यमंत्री भी रह चुके हैं।

स्थानीय मुद्दों को उठाया गंभीरता से
साल 2013 में एक समय ऐसा आया जब उनके नाम राज्य के सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड दर्ज हुआ। इस पद पर वे साल 2014 तक रहे। साल 2014 में राज्य में बीजेपी की सरकार बनी। हेमेंत सोरेन जेएमएम-कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल के गठबंधन का चेहरा बनकर सामने आए। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने स्थानीय मुद्दों को गंभीरता से लिया। आदिवासियों से संबंधित कानून में प्रस्तावित संशोधन का पुरजोर विरोध किया और 70,000 से अधिक अस्थायी शिक्षकों का नियमन करने का समर्थन किया।

81 सीटों में से 47 सीटों पर किया कब्‍जा
उन्होंने बीजेपी की रघुबर सरकार पर खुदरा शराब बिक्री और सरकारी स्कूलों के विलय को लेकर कई सवालिया निशान लगाए। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने आदिवासी समाज का विश्वास जीता जिसका सीधा फायद ये हुआ की जेएमएम के नेतृत्‍व वाले गठबंधन ने राज्‍य की कुल 81 सीटों में से 47 सीटों पर कब्‍जा कर लिया। इसी के साथ हेमंत सोरेन राज्य के 11वें सीएम बन गए हैं। उन्होंने ट्टीट कर पदाधिकारियों एवं साथियों के साथ मुलाकात के पल साझा किए, इसके साथ ही उन्होंने राज्य को विकास पथ  पर ले जाने और अपने संकल्प को गति देने व साथ चलने का आह्वाहन किया।

जीत के बाद मिले सम्मान को एक नई शुरूआत में बदलने का किया आग्रह
हेमंत सोरेन ने ट्वीट कर लिखा, साथियों, मैं अभिभूत हूं आप झारखंडवासियों के प्यार एवं सम्मान से। पर मैं आप सबसे एक करबद्ध प्रार्थना करना चाहूंगा, कि कृपया कर मुझे फूलों के ‘बुके’ की जगह ज्ञान से भरे ‘बुक’ मतलब अपने पसंद की कोई भी किताब दें। मुझे बहुत बुरा लगता है की मैं आपके फूलों को सम्भाल नहीं पाता।

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