नई दिल्ली/टीम डिजिटल। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने यहां पंजाब विश्वविद्यालय (पीयू) की प्रकृति और चरित्र में किसी भी तरह के बदलाव को रोकने के लिये रविवार को केंद्रीय मंत्रियों अमित शाह और धर्मेंद्र प्रधान से हस्तक्षेप की मांग की। राज्य सरकार का यह कदम पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा केंद्र को पंजाब विवि को केंद्रीय विश्वविद्यालय में परिवर्तित करने की संभावनाओं का पता लगाने का निर्देश देने के लगभग एक महीने बाद आया है।
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रविवार को यहां जारी किए गए एक आधिकारिक बयान के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री शाह और केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रधान को संबोधित पत्र में मुख्यमंत्री ने लिखा, च्च्राज्य सरकार पंजाब विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय में बदलने की व्यवहार्यता की जांच करने के लिए भारत सरकार के इस तरह के किसी भी कदम का कड़ा विरोध करती है।’’ मान ने दोनों नेताओं को अवगत कराया कि राज्य सरकार विश्वविद्यालय की प्रकृति और चरित्र में कोई बदलाव पसंद नहीं करेगी क्योंकि ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्रांतीय कारणों से पंजाब के लोगों के दिलों में इसका भावनात्मक स्थान है।
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उच्च न्यायालय ने पिछले महीने केंद्र को पंजाब विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय में बदलने की संभावना की पड़ताल करने का निर्देश दिया था। उच्च न्यायालय ने पंजाब विश्वविद्यालय के एक पूर्व शिक्षक की याचिका पर कहा था, च्च्केंद्र सरकार द्वारा लिए गए निर्णय को सुनवाई की अगली तारीख को अदालत के समक्ष रखा जाए’’ और मामले में सुनवाई की अगली तारीख 30 अगस्त तय की थी।
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मान ने अफसोस व्यक्त किया कि पिछले कुछ समय से, 'कुछ निहित स्वार्थों वाली ताकतें पंजाब विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय में बदलने के लिए मामले को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं’’। हाल ही में, पंजाब विश्वविद्यालय को केंद्रीय दर्जा देने के किसी भी कदम के खिलाफ कई छात्र संगठनों ने चंडीगढ़ में विरोध प्रदर्शन किया था। मान ने दोनों नेताओं को याद दिलाया कि 1966 में पंजाब राज्य के पुनर्गठन के समय, पंजाब विश्वविद्यालय को संसद द्वारा अधिनियमित पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 की धारा 72 (1) के तहत ‘इंटर स्टेट बॉडी कॉर्पोरेट’ घोषित किया गया था।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि अदालतों द्वारा पारित कई फैसलों में इस स्थिति की विधिवत पुष्टि की गई है। उन्होंने कहा कि पंजाब विश्वविद्यालय अपनी स्थापना के समय से ही पंजाब राज्य में लगातार और निर्बाध रूप से कार्य कर रहा है। मान ने यह भी कहा कि पंजाब विश्वविद्यालय को पंजाब की तत्कालीन राजधानी लाहौर से होशियारपुर और फिर चंडीगढ़ में स्थानांतरित किया गया था।
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