Friday, Jan 18, 2019

रेणुका बांध के निर्माण पर आज होगा एमओयू, मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र पहुंचे दिल्ली

  • Updated on 1/10/2019

देहरादून/ ब्यूरो। किसाऊ बांध परियोजना को हरी झंडी मिलने के बाद अब महत्वाकांक्षी रेणुका बांध परियोजना के निर्माण का भी रास्ता साफ हो गया है। हिस्सेदारी वाले सभी राज्यों की सहमति और पर्यावरण समेत अन्य सभी प्रकार के एनओसी मिलने के बाद शुक्रवार को केन्द्रीय जल संसाधान मंत्री की मौजूदगी में इसका एमओयू होना है।

हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर इस बांध का निर्माण प्रस्तावित है। 1100 से अधिक परिवारों के विस्थापन की समस्या का समाधान होने के बाद पर्यावरण प्रदूषण का पेंच फंस गया था। पर्यावरण संबंधी एनओसी मिलने के बाद हिस्सेदारी को लेकर अपर यमुना बेसिन के चार राज्यों हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा और दिल्ली के बीच विवाद पैदा हो गया। केन्द्र सरकार के हस्तक्षेप से इस विवाद का निदान हो गया है। केन्द्र ने बांध के निर्माण में 90 फीसदी खर्च देना स्वीकार कर लिया है।

विद्युत उत्पादन पर आने वाला पूरा खर्च दिल्ली सरकार वहन करेगी। उत्पादित बिजली पर हिमाचल प्रदेश का अधिकार होगा। परियोजना के जल पर दिल्ली, हरियाणा और उत्तराखंड की हिस्सेदारी होगी। शुक्रवार को नई दिल्ली में केन्द्रीय जस संसाधन मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में चारों राज्यों के बीच एमओयू होगा। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत दिल्ली पहुंच चुके हैं।

4600 करोड़ आएगी लागत
इस परियोजना के तहत यमुना की सहायक नदी गिरि पर 148 मीटर ऊंचा बांध बनाया जाएगा। इसके निर्माण में 4600 करोड़ से अधिक की लागत आएगी। जलाशय की जल भंडारण क्षमता 48.9 करोड़ घनमीटर होगी। हिमाचल प्रदेश को यमुना के 3.20 फीसदी जल का उपयोग करने का अधिकार होगा। इसके लिए उसे किसी से अनापत्ति प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं होगी। समझौते के अनुसार वह अपने हिस्से का पानी किसी को भी बेच सकेगा।

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