भाजपा-अकालियों के बीच फिर शुरू हुआ शीतयुद्व

  • Updated on 2/3/2019

नई दिल्ली/(सुनील पाण्डेय)। शिरोमणि अकाली दल (बादल) और भाजपा के बीच चल रहा शीतयुद्व खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के द्वारा अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल को भरोसा देने के बावजूद कि सिख मामलों पर उनकी राय को अहमियत दी जाएगी, बावजूद इसके अकाली दल केे दो माहासचिव प्रेम सिंह चंदूमाजरा एवं मनजिंदर सिंह सिरसा आज भी भाजपा सरकारों को अपने निशाने पर लेने से बाज नहीं आए। 

सांसद चंदूमाजरा ने हजूर साहिब बौर्ड में दो सिख संसद सदस्यों की सदस्य के तौर पर नियुक्ति न करने पर सवाल उठा दिए। साथ ही केंद्रीय संसदीय मंत्रालय द्वारा महाराष्ट्र सरकार को सीधी ना करने पर अपने गुस्से का इजहार किया। चंदूमाजरा ने खुलासा किया कि महाराष्ट्र सरकार ने केद्रीय संसदीय मंत्रालय से दो सिख सांसदों के नाम बतौर सदस्य हजूर साहिब बोर्ड में नियुक्त करने के लिए पत्र भेजा था। 

इसके जवाब में केद्र सरकार ने महाराष्ट्र सरकार को लिख कर भेजा है कि हमारे पास कोई सिख सांसद नहीं है। चंदूमाजरा ने कहा कि हजूर साहिब एक्ट के अनुसार 2 सिख सांसदों की नियुक्ति जल्दी की जानी चाहिए। इसके लिए मेरा व राज्स सभा सांसद भलविंदर सिंह भूदड का नाम भेजा जाना चाहिए। हालंंकि यह भाजपा सरकार पर निर्भर करता है कि वह किन दो सदस्यों को इस बोर्ड में नियुक्त करती है। 

केंद्र में दो सिख मंत्री हरदीप सिंह पुरी व एसएस आहलूवालिया दोनों भाजपा कोटे से हजूर साहिब बोर्ड में सदस्य के तौर पर भाजपा कोटे से दावेदार हो सकते हैं। वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय महासचिव मनजिंदर सिंह सिरसा ने कल  रात भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री आरपी सिंह द्वारा हजूर साहिब बोर्ड का विवाद खत्म होने के किए गए दावे पर पलटवार कर दिया। 

सिरसा टवीट करके कहा कि 17 सदस्यीय बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त करने की ताकत अभी भी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के पास है। महाराष्ट्र सरकार ने सिर्फ सरकार के कोटे से नामजद किए जाने वाले दो सदस्यों की संख्या को 6 करने की प्रस्तावित सुझाव को वापस लेने का ऐलान किया है। सिख कभी भी सरकार के हाथों कमेटी के अध्यक्ष नियुक्त होने केा मंजूर नहीं करेंगे। 

उधर, सूत्रों का दावा है कि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल खुद भाजपा के लिखाफ कुछ नहीं बोलना चाहते। लेकिन अपने दो महासचिवों को दबाव समूह के तौर पर खुला बोलने की आजादी दे रखी है। ताकि गठबंधन की पंजाब में मिलने वाली सीटों तक भाजपा पर दबाव बना रहे। 

बादल मुख्ममंत्री रहते एसजीपीसी अध्यक्ष चुन सकते हैं तो हंगामा क्यो?
उधर, अकाली नेताओं के दावों के बाद सोशल मीडिया पर अजीब बहस छिड़ गई है। कुछ लोगों का कहना है कि पंजाब में मुख्यमंत्री रहते अगर प्रकाश सिंह बादल एसजीपीसी का अध्यक्ष अपनी मर्जी से चुन सकते हैं तो महरारूट्र सरकार द्वारा हजूर साहिब कमेटी का अध्यक्ष चुनने पर सिरसा विरोध क्यों कर रहे हैं। 2015 में सरकार ने हजूर साहिब एक्ट में संशोधन करके अपने विधायक तारा सिंह को कमेटी का अध्यक्ष बनाया था। 

अब 4 साल के बाद इस मसले पर अकाली दल द्वारा की जा नही नुक्ताचीनी गैरजरूरी है। अगर सिरसा को वास्तव में हजूर साहिब के अध्यक्ष पद की नियुक्त को लेकर कोई पंथक भावना है तो वह हरिद्वारा के गुरुद्वारा ज्ञान गोदडी साहिब एवं सिक्किम के गुरुद्वारा डांगमार साहिब को सरकार के कब्जे से आजाद करवाने के लिए आवाज क्यों नहीं उठाते।

झूठ बोल रहे हैं अकाली, 4 साल से क्यों थे खामोश : आरपी सिंह 
भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री आरपी सिंह ने कहा कि अकाली दल के नेता झूठ बोलकमर सिख संगत को बरगला रहे हैं। उन्होंने कहा कि अकाली नेता जिस नोटिफिकेशन की बात कर रहे हैं वह 18 फरवरी 2015 में आया था। किसी भी आर्डिनेंस की उम्र 6 महीने से ज्यादा नहीं होती है। जब तक असंबली में उसको बिल में कनवर्ट न कर दिया जाए। 

आरपी सिंह ने कहा कि अब तक वह कहते थे के वो जो बिल आया है वो गलत है। मुख्यमंंत्री देवेंद्र फर्डविस ने बिल्कुल स्पष्ट कर दिया कि बिल हमेशा के लिए वापस ले लिया है और 1956 का स्टैटस को बना रहेगा। उसके बाद भी इस प्रकार का विषय उठाना किसी सिख को शोभा नहीं देता। 

भड़के आरपी सिंह ने कहा कि अगर इन अकालियों को दर्द है तो 4 साल तक ये लोग उसपर चुप क्यों रहे। आरपी सिंह ने कहा कि  सुखबीर बादल  भाजपा अमित शाह से मिले थे। अगर कोई विषय था तो स्पष्ट कर लेना चाहिए था। अब इस प्रकार की बयानबाजी करके शरारत की क्यों जी जा रही है।

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