Monday, Nov 28, 2022
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cold wave due to unseasonal snowfall, rain stopped chardham yatra

बेमौसम हिमपात से शीतलहर, बारिश से चारधाम यात्रा रुकी

  • Updated on 5/24/2022

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। चिनाब घाटी के ऊंचाई वाले इलाकों में बेमौसम हिमपात ने सैकड़ों खानाबदोश परिवारों को मुश्किल में डाल दिया है क्योंकि बिगड़े मौसम में वे अपने पशुओं के साथ आगे की यात्रा रोकने के लिए मजबूर हैं।     डोडा, किश्तवाड़ और रामबन जिलों के ऊपरी इलाकों में शीतलहर जैसे हालात बने हुए हैं, जिससे केंद्र शासित प्रदेश और पंजाब के मैदानी इलाकों से अपनी यात्रा शुरू करने वाले खानाबदोशों में बेचैनी है।  

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   अधिकारियों ने कहा कि सोमवार की रात से कैलाश पर्वत श्रृंखला, कैंथी, पादरी गली, भाल पादरी, सियोज, शंख पदर, ऋषि दल, गौ-पीड़ा, गण-ठक, खन्नी-टॉप, गुलदंडा, छतर गल्ला व भद्रवाह घाटी के निकट आशा पति ग्लेशियर में ताजा बर्फबारी हुई है। गंडोह के ऊंचाई वाले घास के मैदानों के अलावा ब्रैड बल, नेहयद चिल्ली, शारोन्थ धर, कटारधर, कैंथी, लालू पानी, कलजुगासर, दुग्गन टॉप, गोहा और सिंथान टॉप में भी बेमौसम बर्फबारी हुई है। गर्मियों के दौरान गुज्जर और बकरवाल जनजातियां इन ऊंचाई वाले इलाकों और विशाल चारागाहों में निवास करती हैं।

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     एक अधिकारी ने बताया कि बेमौसम हिमपात और भीषण ठंड की वजह से सैकड़ों आदिवासी परिवार या तो सड़क के किनारे या निचले इलाकों में चिनाब घाटी के विभिन्न हिस्सों में फंस गए हैं।     खानाबदोश गुज्जर समुदाय के बशीर बाउ (69) ने भद्रवाह-पठानकोट राजमार्ग पर गुलडंडा में कहा, च्च्हम बिना भोजन और चारे के सड़क के किनारे खुले में अपनी भेड़-बकरियों के साथ फंस गए हैं और खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।’’   

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 कठुआ जिले के लखनपुर के रहने वाले बाउ ने दावा किया कि बीते कुछ दिनों में भीषण ठंड के कारण उसकी करीब 15 भेड़-बकरियों की जान जा चुकी है। उसने कहा, च्च्हम असमंजस में हैं और तय नहीं कर पा रहे कि यहीं रुके रहें या आगे जाएं।’’  कठुआ के बसहोली के रहने वाले सैन मोहम्मद ने कहा कि वे अपने मवेशियों के साथ पादरी चारागाह की तरफ जा रहे थे तभी खराब मौसम में फंस गए और सरथल में ही रुकने को मजबूर हैं।   उन्होंने बताया, च्च्हमें अपने जानवरों के लिये चारे की व्यवस्था करने में काफी दिक्कत हो रही है। अगर मौसम में सुधार नहीं हुआ तो हमें भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।’’  

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   2011 की जनगणना के अनुसार, चिनाब घाटी के अधिक ऊंचाई वाले घास के मैदान, जो भद्रवाह से जवाहर सुरंग (बनिहाल) और मरमत (डोडा) से पद्दार और मारवाह (किश्तवाड़) तक फैले हुए हैं, मौसम में 30,000 खानाबदोश और भेड़, बकरी, भैंस, घोड़े और खच्चर सहित उनके लाखों मवेशी रहते हैं। हालांकि कुछ जनजाति संगठनों का दावा है कि खानाबदोश आबादी बढ़कर एक लाख से ज्यादा हो गई है।  मौसम विभाग ने बुधवार सुबह से मौसम में कुछ सुधार की उम्मीद व्यक्त की है

बर्फबारी व बारिश से चारधाम यात्रा रुकी

बर्फबारी और बारिश से मंगलवार को चारधाम यात्रा रोक दी गयी और हजारों तीर्थयात्रियों को एहतियातन केदारनाथ तथा यमुनोत्री के मार्गों में बीच में रोक दिया गया। केदारनाथ में मंगलवार सुबह बर्फ गिरनी शुरू हुई थी, वहीं निचले इलाकों में बारिश शुरू हो गयी जिसके बाद अधिकारियों ने गौरीकुंड और सोनप्रयाग में यात्रियों को रोक लिया। यमुनोत्री जा रहे तीर्थयात्रियों को जानकीचट्टी में रोक लिया गया। बद्रीनाथ के आसपास के पहाड़ों पर भी बर्फ गिर रही है। बड़कोट की उप जिलाधिकारी (एसडीएम) शालिनी नेगी ने बताया कि जानकीचट्टी में रोके गये श्रद्धालुओं को मौसम साफ होने के बाद आगे जाने दिया जाएगा।

 

उन्होंने बताया कि खराब मौसम के कारण सोमवार को रोके गये यात्रियों को मंगलवार सुबह यमुनोत्री मंदिर में दर्शन के लिए जाने दिया गया और वे दर्शन करके लौट आये हैं। रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने बताया कि मौसम खराब होने की वजह से केदारनाथ जा रहे तीर्थयात्रियों को सोनप्रयाग तथा गौरीकुंड में रोक लिया गया। उन्होंने कहा कि मौसम साफ होने पर उन्हें दर्शन के लिए जाने दिया जाएगा।    इस साल चारधाम की यात्रा के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु आ रहे हैं।

 


 

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