Tuesday, Nov 30, 2021
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एक बार तो आइए बिहार में : शाहनवाज हुसैन

  • Updated on 11/22/2021

नई दिल्ली। अनामिका सिंह। बिहार की छवि  अभी तक पूरे देश में नकारात्मक बनी हुई थी लेकिन कोरोना काल में बिहार में सबसे ज्यादा निवेश का प्रस्ताव आया है। अब बिहार पुराना बिहार नहीं बल्कि नया बिहार बन गया है जहां लॉ ऑर्डर बेहतर हुआ है। इसीलिए हम सबसे कहते हैं कि एक बार तो आइए बिहार में। उक्त बातें बिहार के उद्योग मंत्री शाहनवाज हुसैन ने प्रगति मैदान में चल रहे टे्रड फेयर में बिहार पवेलियन का उद्घाटन करने के दौरान कहीं। इस दौरान उन्होंने बिहार पवेलियन का दौरा किया, उनके साथ भाजपा नेता मनोज तिवारी व बिहार सरकार के आला अधिकारी भी मौजूद रहे। हुसैन ने कहा कि बिहार में चार बड़े एक्सपो का आयोजन पटना, नालंदा, भागलपुर और गया में किया जाएगा। उन्होंने एनडीए सरकार की सराहना करते हुए कहा कि कोरोना काल में बुनकरों को 10-10 हजार रुपए की सहायता राशि दी गई है। 2 हजार एकड़ में गया में इंडस्ट्रियल एरिया विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह बताते हुए मुझे खुशी हो रही है कि दुलारी देवी यहां आने वाले युवाओं के प्रेरणा बनी हुई है। उन्होंने कहा कि मुझे खुशी हो रही है कि बिहार स्टार्टअप नीति 2017 के तहत 5 स्टार्टअप को लाभ प्राप्त हुआ और वो एप्लिक कला, सुजनी कला और मधुबनी पेंटिंग की कलाकारी को अत्याधुनिक प्रबंधन कौशल के साथ आगे बढ़ा रहे हैं।
दिल्ली में भी हैं सम्राट अशोक के शिलालेख

मुगलों से लेकर अभिनेत्रियां भी पहनती हैं इनकी साड़ी
यूपी पवेलियमन में आजमगढ़ सिल्क साड़ी पर महिलाओं की भीड़ काफी देखी जा रही है। यहां अभिनेत्रियों की साडी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। 16वीं शताब्दी से साड़ी का काम करने वाले परिवार के मोहम्मद तबीश ने बताया कि उनकी साड़ी अभिनेत्री रेखा, शबाना आजमी, अनुष्का शर्मा समेत बॉलीवुड की कई अभिनेत्रियों ने पहनी है। यही नहीं डिजाइनर मनीष मल्होत्रा भी उनके ग्राहक हैं। उनका कहना है कि उनके पूर्वज मुगल शासकों के लिए कपड़े तैयार किया करते थे। यहां रखी बनारसी सिल्क की साडी जिसपर गोल्डन वाटर जरी का काम है और मूल्य दो लाख रूपए है उसकी बुकिंग खूब हो रही है। टे्रड फेयर के बाद बुकिंग करवाने वालों को सप्लाई साडिय़ां की जाएंगी। उन्होंने बताया कि इस साड़ी को ढाई महीने में बनाया जाएगा और बेहतरीन कारीगर इसे तैयार करेंगे।

लुप्त होती कानी शॉल की परंपरा को फिर बढ़ाया
कश्मीर में कानी गांव में बनाई जाने वाली कानी शॉल की परंपरा 800 साल पहले लुप्त हो गई थी। लेकिन बीते 150 सालों में इस परंपरा को पुन: जीवित करने का प्रयास गांव के कारीगरों द्वारा शुरू किया गया। जिसके बाद पश्मीना से बनने वाली कानी शॉल अपने खूबसूरत डिजाइन, गर्माइश व हल्केपन के लिए काफी मशहूर हो गई। कानी शॉल के कारीगर अफाक अहमद मीर ने बताया कि उनकी तीन पीढिय़ां इस लुप्त परंपरा को जीवित रखने का काम कर रही हैं। उनका कहना है यह असली पश्मीना होता है जिसे लद्दाख से मंगवाया जाता है। जिसकी खासियत होती है कि उसे आप घर में धो व सूखा सकते हैं इसका दाम 25 हजार से डेढ़ लाख रूपए तक का होता है।

नेचुरल ट्राइबल साडी ने बिखेरे रंगा
झारखंड पवेलियन में इस बार नेचुरल ट्राइबल साडी व परिधान काफी पसंद की जा रही है। मालूम हो कि झारखण्ड में तसर सिल्क बहुत मात्रा में उत्पादित किया जाता है। ट्राइबल लोगो की अपनी अलग ही संस्कृति होती है। जिसकी झलक उनके कपड़ो पर देखी जाती है। यहां मिलने वाली साडिय़ों पर ट्राइबल आर्ट का ही प्रिंट देखा जा रहा है। ट्राइबल परिधान बेच रहीं कामिनी कुमारी ने बताया कि वो सिल्क और कॉटन की पारम्परिक साडिय़ां लेकर आईं है। जिसकी कीमत 8000 से 12000 रूपए है। उन्होंने बताया की हम अपने कपड़ो पर प्राकृतिक रंगो द्वारा अपने ही कारीगरों द्वारा पेंटिंग या कढ़ाई करवाते है,  जिससे पहनने वाले को उसके नेचुरल लुक का आभास होता है।

छत्तीसगढ़ी चावल, काले गेहूं का आटा व कोदो खरीद रहे हैं लोग
सरस आजीविका मेला 2021 में सोमवार को केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की ज्वाइंट सेक्रेटरी नीता केजरीवाल और अतिरिक्त महानिदेशक पर्यटन अनीता होलकर ने विजिट किया। इस दौरान उन्होंने यहां लगे स्टॉलों का भी मुआयना किया और सभी एसएचजी महिलाओं का हौसला भी बढ़ाया। सरस आजीविका मेला से वोकल फॉर लोकल अभियान को भी बल मिल रहा है। इस दौरान छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले की लीली ठाकुर ने बताया कि हमारे पास चावल की कई वेरायटी है। इसके अलावा काले गेहूं का आटा, अमचूर, इमली, कुकी, कोदो, रागी के आटा को लोगों द्वारा काफी पसंद किया जा रहा हैं। 
 

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