Saturday, Nov 17, 2018

NIA की बात को कमेटी ने दिया गलत करार, कहा- मस्जिद में नहीं लगा लश्कर-ए-तैयबा का पैसा

  • Updated on 11/2/2018

नई दिल्ली/अनामिका सिंह। हरियाणा के पलवल स्थित उतावर गांव में बनाई जा रही मस्जिद में हाफिज सईद के आतंकी संगठन से वित्तीय मदद की बात एनआईए द्वारा कहे जाने के बाद दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग (डीएमसी) ने एक फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाई थी, जिसने अपनी रिपोर्ट पेश कर दी है। यह रिपोर्ट पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों, स्थानीय पंचायत, क्षेत्र के लोगों और प्रभावित परिवारों के लोगों से बातचीत पर आधारित है।

इस कमेटी की अगुवाई प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता उवेस सुलतान खान ने की थी जो डीएमसी के सलाहकार समिति के सदस्य हैं। इसके अलावा कमेटी में एसी माइकल, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी अमृतसर के सदस्य सरदार गुरमिंदर सिंह मठरु और वकील व मानवाधिकार कार्यकर्ता अबू बक्र सब्बाक रहे।

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मालूम हो कि हाल ही में एनआईए की टीम द्वारा दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में रहने वाले मोहम्मद सलमान को गिरफ्तार किया गया था। सलमान पर आरोप था कि उसने उतावर में बनाई जा रही खुलफाये राशिदीन मस्जिद में आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का पैसा लगवाया है। साथ ही अपनी बेटियों की शादी में भी आतंकवादी संगठनों से पैसा लिया है।

इस पूरे मामले में आयोग की ओर से एक फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का गठन किया गया था। इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट पेश की है, जिसमें किसी भी प्रकार की आतंकवादी संगठन से 70 लाख की वित्तीय मदद के आरोप साबित नहीं हो पाए हैं।

वहीं कमेटी का कहना है कि मुहम्मद सलमान व मस्जिद से जब्त की गई रसीदें, रिकॉर्ड, रजिस्टर, डायरियां, हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव का जब्ती रिकॉर्ड एनआईए द्वारा नहीं बनाया गया और न ही इसकी कोई रसीद या नकल उपलब्ध करवाई गई। कमेटी का कहना है कि मस्जिद तब्लीगी जमाअत की है जबकि लश्कर-ए-तैयबा और फलाहे इंसानियत फाउंडेशन का ताल्लुक विरोधी विचारधारा से है। जिनमें एक-दुसरे की शिक्षाओं और कार्यों से कोई सहमति नहीं है।

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आखिर जमीन किसकी?
आयोग का कहना है कि स्थानीय हिंदुओं और मुसलमानों ने मिलकर कुल 10 एकड़ जमीन मस्जिद और मदरसे के लिए 8 एकड़ जमीन सहित सरकारी अस्पताल और ओल्ड एज होम के लिए दो एकड़ जमीन शामिलाती प्रॉपर्टी से दान दी थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि मस्जिद का नाम आपसी प्रॉपर्टी के झगड़े के कारण घसीटा गया है। 

कमेटी द्वारा जारी किए गए नतीजे के मुख्य बिंदू

  • कमेटी ने सभी धर्म व जातियों के समूहों से मुलाकात की, जिसमें मस्जिद निर्माण में खुद चंदा दिए जाने की बात कही गई।
  • हरवेंद्र यादव (एनआईए) ने मुहम्मद सलमान के परिवार से कहा कि किसी ने उसके खिलाफ मंत्रालय में शिकायत की है जोकि एनआईए को सौंपी गई।
  • शिकायत, एफआईआर और गिरफ्तारी की तारीख घटनाओं के ऑर्डर से मेल नहीं खाते।
  • एनआईए टीम ने मस्जिद पर छापा मारा, लेकिन गांव के निवासी या मस्जिद कमेटी सदस्य का बयान रिकॉर्ड नहीं किया।

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एनआईए की ओर से गंभीर गलतियां : जफरूल इस्लाम खां
आयोग के चेयरमैन डॉ. जफरूल इस्लाम खां ने कहा कि एनआईए की ओर से बहुत सी गंभीर अमली कमियां पाई गईं। केस का नाम और उस की तफसील एनआईए की वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं है। वहीं दो प्रेस कॉन्फ्रेंस जोकि 26 सितम्बर और 12 अक्तूबर को की गई आखिर उनमें एनआईए ने मस्जिद को आतंकवादी फंड से बनाए जाने का जिक्र क्यों नहीं किया है।

 

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