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उत्तराखंड: मसूरी में हिमालय राज्यों का कॉमन एजेंडा तैयार

  • Updated on 7/29/2019

देहरादून/ब्यूरो। देश के 11 हिमालयी राज्यों ने केन्द्र सरकार (modi government) से अपने अधिकार मांगने और विकास में परस्पर सहयोग करने का फैसला लिया है। असम को छोड़कर शेष 10 राज्यों के मुख्यमंत्री अथवा प्रतिनिधि मसूरी में आयोजित हिमालन कॉन्क्लेव बैठक में शरीक हुए। निर्णय लिया गया कि हिमालयी राज्यों की एक समान जरूरतें व समस्याएं हैं, जिनका निदान एकजुट होकर किया जा सकता है। केन्द्र से पर्यावरणीय सेवा की एवज में सभी पहाड़ी राज्यों को ग्रीन बोनस देने, हिमालयी राज्यों के विकास के लिए केन्द्र में एक मंत्रालय गठित करने और हिमालयन कॉन्क्लेव का आयोजन प्रतिवर्ष करने पर भी सहमति बनी।

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सफल रहा आयोजन

कॉन्क्लेव के बाद आयोजित पत्रकार वार्ता में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बताया कि यह आयोजन सफल रहा है। प्रथम बार हिमालयन राज्यों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें हिमाचल प्रदेश, नागालैंड, मेघालय के मुख्यमंत्री, अरुणाचल प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं अन्य राज्यों के प्रतिनिधियों शामिल थे। उन्होंने कहा कि हिमालयन कॉन्क्लेव में मुख्यतः आपदा, जल शक्ति, पर्यावरणीय सेवाओं आदि पर चर्चा की गई।

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सभी हिमालय राज्यों द्वारा एक कॉमन एजेंडा ‘मसूरी संकल्प’ तैयार कर केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (nirmala sitharaman) को दिया गया। हिमालयी राज्यों ने मांग की कि पर्यावरणीय सेवाओं के लिए ग्रीन बोनस दिया जाना चाहिए। हिमालयी राज्य देश के जल स्तम्भ हैं, जो प्रधानमंत्री के जल शक्ति संचय मिशन में प्रभावी योगदान देंगे। नदियों के संरक्षण व पुनर्जीवीकरण के लिए केन्द्र पोषित योजनाओं में हिमालयी राज्यों को वित्तीय सहयोग दिया जाना चाहिए।

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मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बताया कि इस पर भी सहमति बनी कि नए पर्यटन स्थलों को विकसित करने में केन्द्र सरकार को सहयोग करना चाहिए। देश की सुरक्षा को देखते हुए पलायन रोकने के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। हिमालयी राज्यों की इस चिंता पर केन्द्रीय वित्त मंत्री द्वारा भी आश्वासन दिया गया। सम्मेलन में नीति आयोग, पन्द्रहवां वित्त आयोग व वित्त मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा हिमालयी राज्यों के लिए बजट में अलग से प्लान किये जाने का आश्वासन दिया गया।

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कॉमन एजेंडे के मुख्य बिन्दु 

  • हिमालयी राज्यों को पर्यावरणीय सेवाओं के लिए मिले ग्रीन बोनस।
  • हिमालयी क्षेत्र के विकास के लिए केन्द्र में गठित हो अलग मंत्रालय।
  • हर साल आयोजित किया जाएगा हिमालयन कॉन्क्लेव। 
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