Wednesday, Feb 19, 2020
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कोरेगांव-भीमा मामला NIA को सौंपना झूठ पर पर्दा डालने की कोशिश : भाकपा

  • Updated on 1/27/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। कोरेगांव-भीमा मामले की जांच पुणे पुलिस से लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपे जाने की ङ्क्षनदा करते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने सोमवार को आरोप लगाया कि यह कदम भाजपा की पूर्व सरकार के 'झूठ एवं गलतियों’’ पर ‘‘पर्दा डालने की कोशिश’’ है। इस मामले की जांच पुणे पुलिस कर रही थी और केंद्र का कोरेगांव-भीमा जांच को शुक्रवार को एनआईए को सौंपने के फैसले की कांग्रेस और राकांपा दोनों ने कड़ी आलोचना की है। 

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झूठ एवं अन्याय को छिपाने की कोशिश

वामपंथी पार्टी की ओर से जारी बयान में कहा गया, 'भाकपा के राष्ट्रीय सचिव ने कोरेगांव-भीमा मामले की जांच पुणे पुलिस से लेकर एनआईए को सौंपने के केंद्र सरकार के फैसले को गंभीरता से लिया है। यह भाजपा की पूर्व सरकार के झूठ एवं अन्याय को छिपाने की कोशिश है। उस वक्त तत्कालीन एनआईए ने पुणे पुलिस को क्लीन चिट दी थी और जांच जारी रखने की अनुमति दी थी।’’ 

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साथ ही पार्टी ने मांग की केंद्र सरकार के फैसले को तत्काल वापस लिया जाना चाहिए और राज्य सरकार से मामले में न्याय सुनिश्चित करने के लिए फिर से जांच शुरू करने की अपील की। उसने कहा, 'पार्टी केंद्र सरकार द्वारा राजनीतिक फायदों के लिए एनआईए के प्रयोग की निंदा करती है।’’ 

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कई कार्यकर्ताओं को किया था गिरफ्तार

उल्लेखनीय है कि पुणे में कोरेगांव-भीमा युद्ध स्मारक के निकट एक जनवरी, 2018 को हिंसा भड़क उठी थी। दलित बड़ी संख्या में इस स्मारक पर पहुंचे थे जो ब्रिटिश बलों की जीत का प्रतीक है। इस बल में दलित सैनिक भी शामिल थे जिन्होंने 1818 में ब्राह्मण पेशवा शासकों की सेना को हराया था। 

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पुलिस ने दावा किया था कि 31 दिसंबर को एल्गार परिषद सभा में दिए गए भड़काऊ भाषणों के चलते हिंसा हुई और इस सभा के आयोजन के लिए माओवादी जिम्मेदार थे। बाद में उन्होंने तेलुगु कवि वरवर राव और कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज समेत वामपंथी विचारधारा वाले कई कार्यकर्ताओं को माओवादियों से कथित संबंधों के लिए गिरफ्तार किया था। 

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