Sunday, Apr 18, 2021
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conflict between power and social media facebook-google is breaking the constitution pragnt

'सत्ता' और 'सोशल मीडिया' में बढ़ा टकराव, संविधान का दायरा लांघ रहे फेसबुक-गूगल

  • Updated on 2/26/2021

नई दिल्ली/ सूरज ठाकुर। दुनियाभर में लोकतांत्रिक देश तेजी से मजबूत होते जा रहे हैं और मनमानी पर उतारू फेसबुक (Facebook) और गूगल (Google) पर लगाम लगाने की तैयारी कर रहे हैं।

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दुनियाभर में लगाम लगाने की कवायद
अमेरिका से लेकर यूरोप और आस्ट्रेलिया तक में इन दिनों टैक जगत की दिग्गज कंपनियों के खिलाफ सत्ता तंत्र में गुस्सा है। अलग-अलग देशों के संविधान का दायरा लांघते इन सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर नियंत्रण के लिए कहीं कानून लाए जा रहे हैं तो कहीं कंटैंट के लिए इन्हें जवाबदेह बनाया जा रहा है।

हालांकि अदालतों के जरिए गूगल पर पहले भी कई देशों में कारवाई हो चुकी है लेकिन अब विधायिका सीधे तौर पर इनके खिलाफ मैदान में है क्योंकि फेसबुक और गूगल कई देशों के संविधान का दायरा लांघकर अपने बनाए नियमों के मुताबिक काम कर रहे हैं और इन कंपनियों का रवैया लोकतांत्रिक देशों को अंदरूनी दखलांदाजी प्रतीत हो रहा है और गूगल व फेसबुक के खिलाफ पर अब दुनिया एकजुट होने लगी है।

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दुनिया के देशों में सोशल मीडिया के हालिया घटनाक्रम 
सोशल मीडिया ने सीधे तौर पर लोकतंत्र और लोगों को प्रभावित करना भी शुरू कर दिया है। सोशल मीडिया व्यापक स्तर पर संचार सुविधाओं का लोकतंत्रीकरण करता जा रहा है। विश्वभर के अरबों लोगों ने अब सूचना को संरक्षित रखने और इसका प्रसार करने के पारंपरिक माध्यमों को चलन से लगभग बाहर कर दिया है। सोशल मीडिया के उपभोक्ता अब मात्र उपभोक्ता ही नहीं है, वे अब इस पर प्रसारित होने वाली सामाग्री को तैयार करने वाले प्रसारकर्ता भी बन गए हैं।

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रूस ने लगाया ट्विटर के 100 खातों पर प्रतिबंध 
एक वर्ष से भी कम समय में कम से कम तीसरी बार हुआ है कि ट्विटर ने रूस की इंटरनेट रिसर्च एजेंसी (आई.आर.ए.) ने 2016 के राष्ट्रपति चनाव में हस्तक्षेप के करने के लिए जिम्मेदार ट्रोल फार्म के लिंक वाले खातों पर प्रतिबंध लगा दिया है। टिवटर ने कहा कि उसने कंपनी के साथ दो नैटवर्क में 31 खातों को निलंबित कर दिया है। टिवटर ने 373 खातों के खिलाफ कार्रवाई की और कहा कि इनके आर्मेनिया, ईरान और रूस के कनैक्शन थे।

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जब टिक-टॉक ने दीं गलत सूचनाएं 
टिक-टॉक ने पिछले साल जुलाई और दिसंबर के बीच एप ने 2020 के अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव और कोरोना वायरस महामारी के बारे में गलत जानकारी देने के लिए अपने हजारों वीडियो हटा दिए हैं। यह तो यही साबित करता है कि टिक टॉक गलत जानकारी साझा कर चुका था। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने चनाव में गलत सचना या मीडिया को सांझा किए 347,225 वीडियो बाहर निकाले। अतिरिक्त 441,000 क्लिप को एप की सिफारिशों से हटा दिया गया क्योंकि सामग्री आपतिजनक थी। 

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फेसबुक की म्यांमार में भूमिका 
फेसबुक इंक ने म्यांमार की सेना से जुड़े पृष्ठों पर प्रतिबंध लगा दिया है और संबद्ध वाणिज्यिक संस्थाओं से विज्ञापन पर रोक लगा दी है, जिससे दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्र में तख्तापलट का विरोध बढ़ रहा है। म्यांमार की सत्तारूढ़ सरकार ने इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को फेसबुक तक पहुंच को अवरुद्ध करने का आह्वान किया था। फेसबुक म्यांमार के पत्रकारों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा की व्यवस्था कर रहा है और सैन्य प्रवक्ताओं की पहुंच और गलत सूचना पर रोक लगा रहा है।

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अब सोशल मीडिया को न्यूज के पैसे
ऑस्ट्रेलिया में गूगल और फेसबुक को समाचार के लिए भुगतान करने हेतु मजबुर करने वाला कानुन प्रभावी होने के लिए तैयार है। कानून बनाने वालों का कहना है कि फिलहाल इसमें समय लगेगा। इसके बदले में फेसबुक ऑस्ट्रेलिया के लोगों द्वारा फेसबुक पर न्यूज सांझा करने और एक्सैस करने से प्रतिबंध हटाने पर सहमत हो गया है। रॉड सिम्स ने कोड का मसौदा तैयार किया है। उन्होंने कहा कि वह खुश थे कि संशोधित कानून ऑस्ट्रेलियाई समाचार प्रकाशकों और इंटरनेट के दो प्रवेश द्वारों के बीच बाजार के असंतुलन को ठीक करेगा।

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अमरीकी संसद ने तलब किया सोशल मीडिया 
सोशल मीडिया पर फेक न्यूज का प्रसार नया नहीं है। इसके जरिए लोगों में भ्रम फैलाने का सिलसिला बहुत पहले से चला आ रहा है। इसी क्रम में गलत जानकारियां देने और फेक न्यज फैलाने के मामले में सोशल मीडिया के तीन दिग्गज फेसबुक, गूगल और ट्विटर के सी.ई.ओ. को अमेरिकी संसद में तलब किया गया है। इसके अलावा, आस्ट्रेलिया में फेसबुक की ओर से खबरों के प्रतिबंध लगाने के बाद वहां के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरीसन भी खासे परेशान हैं। उन्होंने इस संबंध में भारत से मदद मांगी है।

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कई देशों में जंजाल बनता जा रहा सोशल नेटवर्क 
सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म सुचना प्रसार में जन-जन तक जहां अहम भूमिका निभा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर लोकतांत्रिक प्रक्रिया में कई देशों में जालजंजाल भी बनते जा रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक लगभग 75% साइबर अपराध जैसे कि बाल यौन शोषण, आतंकवादी कट्टरपंथी, वित्तीय अपराध, फेक न्यूज सहित कानून और व्यवस्था की गड़बड़ी मैसेजिंग एप या सोशल मीडिया के माध्यम से फिशिंग या सोशल इंजीनियरिंग हमले के साथ शुरू होते हैं।

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भारत और अन्य देशों में डाटा संरक्षण कानून 
• अनुमान के मुताबिक, वर्ष 2023 तक यह संख्या लगभग 447 मिलियन तक पहुंच जाएगी। 
• भारत में वर्ष 2019 तक 574 मिलियन सक्रिय इंटरनेट उपयोगकर्ता थे। इंटरनेट प्रयोग करने के मामले में चीन के बाद भारत दूसरे स्थान पर है। 
• वर्तमान में भारत में किसी व्यक्ति के डाटा की सुरक्षा के लिए कोई सख्त कानून या विशेष प्रावधान नहीं है।

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रूसी संघ में कायदे-कानून 
• रूसी संघ में इलैक्ट्रॉनिक लेन-देन और उपभोक्ता संरक्षण के साथ-साथ गोपनीयता एवं डाटा संरक्षण के लिए कानून मौजूद है। 
• प्रमुख कानून व्यक्तिगत डाटा 2006 (व्यक्तिगत डाटा कानून) पर फैडरल लॉ नंबर 15-एफ.जैड है, जिसे कई अतिरिक्त कानूनों, नियमों और दिशा-निर्देशों द्वारा जोड़ा गया है। 
• कई रूसी कानूनों का संयोजन सभी क्षेत्रों में व्यापक गोपनीयता सुरक्षा प्रदान करता है।

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194 में से 128 देशों ने डाटा और गोपनीयता की सुरक्षा के लिए कानून बनाए हैं। अफ्रीका और एशिया ऐसे 55% देशों ने ऐसे कानूनों को अपनाया है जो एक समान स्तर को दिखाते हैं। इनमें से कम-से-कम 23 विकसित देश हैं।

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अमेरिका 
अमेरिका के पास विशिष्ट डाटा सुरक्षा कानून और नियम हैं जो अमेरिकी नागरिकों के डाटा के लिए राज्य स्तरीय कानून के तहत काम करते हैं।

ऑस्ट्रेलिया 
गोपनीयता अधिनियम 1988 एक ऑस्ट्रेलियाई कानून है जो व्यक्तियों की व्यक्तिगत जानकारी संबंधी डाटा को नियंत्रित करता है।

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यूनाइटेड किंगडम में डाटा संरक्षण 
• यू.के. में इलैक्ट्रॉनिक लेन-देन, उपभोक्ता संरक्षण, गोपनीयता और डाटा संरक्षण तथा साइबर अपराधों के लिए अलग कानून हैं। 
• वर्ष 2018 में फेसबुक के स्वामित्व वाले व्हाट्सएप ने यू.के. के सूचना आयुक्त कार्यालय के एक उपक्रम पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें उसने सार्वजनिक रूप से भविष्य में फेसबुक के साथ व्यक्तिगत डाटा सांझा नहीं करने की प्रतिबद्धता जताई है।

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यूरोपीय संघ में क्या है सुरक्षा 
• यूरोपीय संघ के 45 में से 43 देशों के पास विशेष रूप से डाटा सुरक्षा के लिए कानून हैं। 
• व्हाट्सएप कानूनी रूप से यूरोपीय क्षेत्र में फेसबुक के साथ डाटा सांझा नहीं करने के लिए बाध्य है क्योंकि यह सामान्य डाटा संरक्षण विनियमन (जनरल डाटा प्रोटैक्शन रैगुलेशनजी.डी.पी.आर.) के प्रावधानों का उल्लंघन है। 
• जी.डी.पी.आर. यूरोपीय संघ कानून में यूरोपीय संघ और यूरोपीय आर्थिक क्षेत्र में सभी व्यक्तियों के डाटा संरक्षण और गोपनीयता पर एक अधिनियम है।

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