Tuesday, Nov 30, 2021
-->
congress'''''''' 40 formula can increase the problems of other parties

कांग्रेस का 40 का फारमूला दूसरे दलों की मुश्किलें बढ़ा सकता है

  • Updated on 10/20/2021

नई दिल्ली/(शेषमणि शुक्ल)। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उतरने से पहले कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी की ओर से दिया गया 40 का फारमूला पार्टी को कोई फायदा पहुंचाए या न पहुंचाए, विरोधी दलों की मुश्किलों में इजाफा जरूर करता दिख रहा है। वैसे कांग्रेस ने यह सियासी दांव काफी सोच-समझ कर खेला है। कांग्रेस के रणनीतिकारों को इस दांव से फायदे की पूरी उम्मीद दिख रही है। खासकर तब, जब भाजपा उज्ज्वला योजना, शौचालय योजना, तीन तलाक जैसे मुद्दों को महिला सशक्तिकरण के नाम पर प्रचारित करने पर जोर दिए पड़ी है।

‘लडक़ी हूं, लड़ सकती हूं’ स्लोगन के साथ प्रियंका ने मंगलवार को यूपी विधानसभा चुनाव में पार्टी की ओर से 40 फीसदी टिकट महिलाओं को देने की घोषणा की। राज्य की 403 विधानसभा सीटों का 40 फीसद का मतलब करीब 160 सीटों पर महिला उम्मीदवार। यूपी की सियासत को करीब से देख रहे जानकारों का कहना है कि यह घोषणा जिस सहजता से की गई, उस पर अमल करना उतना ही कठिन है।

यूपी में जहां कांग्रेस का संगठन मृतप्राय अवस्था में है, वहां 160 महिला उम्मीदवार ढूढऩा ही पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी। यही स्थिति दूसरे दलों के सामने भी होने वाली है। पिछले दो चुनावों के ही आंकड़े देखें तो 2017 में बसपा ने 403 सीटों में से केवल 20 महिलाओं को टिकट दिया। वहीं 2012 में यह संख्या 33 थी। जबकि सपा-कांग्रेस गठबंधन ने 2017 में 33 महिलाओं को चुनाव लड़वाया था, जिसमें से 22 सपा की थीं और 11 कांग्रेस की। 2012 में सपा ने 34 महिलाओं को टिकट दिया था।

जानकार यह भी मान कर चल रहे हैं कि कांग्रेस को अपने इस दांव का कोई फायदा मिले या न मिले, लेकिन विरोधी दलों की मुश्किलें बढ़ा सकता है। खासकर सपा और बसपा। बसपा प्रमुख मायावती की तो प्रतिक्रिया भी आ गई, जिसमें उन्होंने इसे कांग्रेस का चुनावी स्टंट करार दिया है। जानकार मानते हैं कि कांग्रेस का यह दांव 2017 से 2021 के बीच यूपी में हुए विभिन्न चुनावों के आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए है।

2019 के लोकसभा चुनाव के वक्त राज्य में 63.25 फीसद महिला मतदाताओं ने वोट किया था, जबकि पुरुषों का वोट प्रतिशत 59.5 था। वहीं, हाल में हुए राज्य के पंचायत चुनावों में 54 फीसदी सीट महिलाओं ने जीती। हालांकि अब तक का रिकार्ड यही रहा कि स्थानीय निकायों की अपेक्षा विधानसभा और लोकसभा में महिला प्रत्याशियों की जीत बहुत सीमित रही।

यूपी विधानसभा में कभी भी 40 से ऊपर नहीं रही महिला विधायकों की संख्या

उत्तर प्रदेश में 1952 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में 20 महिला विधायक चुनी गईं। इसके बाद यह संख्या ऊपर-नीचे होती रही और कभी भी 40 के पार नहीं पहुंच सकी। सबसे ज्यादा 38 महिला उम्मीदवार 2017 में जीत कर विधानसभा पहुंची थीं। जबकि 2012 में यह संख्या 36 थी, जिसमें 19 समाजवादी पार्टी के टिकट से जीत कर राज्य विधानसभा में पहुंची थीं।

इसके पहले 1985 में 31 महिला विधायक बनीं, 1989 में यह संख्या 18 थी। 1991 में यह घट कर 10 रह गई थी। 1993 में यह संख्या बढ़ कर 14 पहुंची। इसके बाद 1996 में 20 और 1992 में 26 महिला विधायक रहीं। लेकिन 2007 में घट कर तीन पर पहुंच गई, जो अब तक की सबसे कम संख्या थी। जानकारों का मानना है कि कांग्रेस को अपनी इस घोषणा का फायदा तब मिल सकता है, जब वह प्रियंका गांधी वाड्रा को मुख्यमंत्री चेहरा घोषित कर चुनाव लड़े। लेकिन इससे जुड़े सवालों को स्वयं प्रियंका ने ही प्रेस कान्फ्रेंस में टाल दिया।

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।

comments

.
.
.
.
.