Monday, Aug 02, 2021
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कांग्रेस ने पीएम केयर्स फंड, वेंटीलेटर खरीद में गड़बड़झाले का लगाया आरोप

  • Updated on 7/5/2020

 

नई दिल्ली/ब्यूरो। कांग्रेस ने एक बार फिर पीएम केयर्स फंड और वेंटीलेटर खरीद में गड़बड़झाले का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि वेंटीलेटर खरीद में न तो नियमों का पालन किया गया और न ही पारदर्शिता बरती गई। साथ ही कंपनी की ओर से बताई जा रही कीमत और पीएम केयर्स से आवंटित धन के हिसाब-किताब में काफी गड़बड़ी है।

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कांग्रेस प्रवक्ता प्रोफेसर गौरव वल्लभ ने रविवार को वीडियो लिंक से हुई प्रेस कांफ्रेंस में आरोप लगाया कि वेंटीलेटर खरीद में भारी वित्तीय धांधली दिखती है। उन्होंने कहा कि 31 मार्च, 2020 को  भारत सरकार ने 40,000 वेंटिलेटर खरीदने का ऑर्डर दिया। 30,000 वेंटिलेटर स्केन रे टेक्नॉलोजी से और 10,000 वैंटिलेटर अग्वा हैल्थ केयर कंपनी से खरीदने का तय हुआ। 23 जून को पीएम केयर फंड से 2,000 करोड़ रुपये का आवंटन करते हुए 50,000 वेंटिलेटर खरीदने की बात कही गई।  

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कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि जिस वक्त 40,000 वेंटीलेटर खरीद के ऑर्डर दिए गए, उस वक्त पीएम केयर्स फंड स्थापित ही नहीं था। पीएम केयर्स से जिन 50,000 वेंटीलेटर्स की खरीद की बात कही गई, क्या पूर्व के 40 हजार वेंटीलेटर्स भी उसमें शामिल हैं अथवा दोनों अलग-अलग खरीद हैं। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि 23 जून की प्रधानमंत्री कार्यालय की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक 1,340 वेंटिलेटर उस दिन तक सप्लाई हुए थे, जबकि ऑर्डर दिए हुए ढाई महीने का वक्त बीत चुका था। इस बीच वेंटीलेटर के अभाव में जाने कितने लोगों की जान चली गई। इस मिसमैनेजमेंट के लिए कौन जिम्मेदार है।

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 50,000 वेंटिलेटर के लिए 2000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, यानि एक वेंटीलेटर की कीमत 4 लाख रुपए बैठी। जबकि अग्वा हेल्थ केयर कंपनी के सीओ और उसके मैनेजमेंट के लोगों ने कहा कि उनके एक वेंटिलेटर की कीमत डेढ़ लाख रुपए है। तो यह सहज सवाल उठता है कि ढाई लाख रुपये प्रति वेंटीलेटर का गड़बड़झाला कहां और कैसे हुआ। 

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कांग्रेस नेता ने वेंटीलेटर खरीद में कॉम्पिटेटिव बिडिंग या ओपन टेंडरिंग की प्रक्रिया नहीं अपनाए जाने को लेकर भी सवाल किया। कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार पीएम केयर्स फंड में बीएसएनएल, ओएनजीसी, भेल या एनटीपीसी के सीएसआर का पैसा ले रही है, जो जनता के टैक्स का पैसा है तो यह कहां खर्च हो रहा है, उसका ब्योरा देश के सामने लाया जाना चाहिए। उस फंड का ऑडिट होना चाहिए। इस फंड को आरटीआई के दायरे में लाया जाना चाहिए, इसमें आपत्ति क्यों।

 

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