Sunday, Aug 01, 2021
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मुस्लिमों और हिंदुओं के चरमपंथीकरण की तुलना पर फंसे दिग्विजय सिंह

  • Updated on 10/2/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। संयुक्त राष्ट्र (United Nation) महासभा के 74वें सत्र में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran khan) के हालिया भाषण का हवाला देते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh) ने बुधवार को कहा कि मुस्लिमों के चरमपंथीकरण की तरह हिंदुओं का चरमपंथीकरण भी खतरनाक है।

उनके इस बयान पर विवाद उत्पन्न हो गया है। दिग्विजय ने महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर यहां आयोजित एक कार्यक्रम में कहा, आपने (संयुक्त राष्ट्र महासभा के 74वें सत्र में) पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान का हालिया भाषण सुना होगा जिसमें वह इस्लामोफोबिया और इस्लामी चरमपंथ की बात कर रहे थे। 

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इसके विरोध में रेडिकलाइजेशन ऑफ द हिंदूज ( हिंदुओं का चरमपंथीकरण) की बात की जा रही है और रेडिकलाइजेशन ऑफ द हिंदूज भी उतना ही खतरनाक है, जितना तरनाक रेडिकलाइजेशन ऑफ द मुस्लिम्स (मुस्लिमों का चरमपंथीकरण) है।  
उन्होंने कहा, पाकिस्तान में बहुसंख्यकों का सांप्रदायिकरण हुआ है और वहां के हालात आप देख ही रहे हैं। इसी तरह अगर भारत में बहुसंख्यकों का सांप्रदायिकरण होगा, तो इसके दुष्परिणामों से हमारे देश को बचाना आसान नहीं होगा। राज्यसभा सदस्य ने यह भी कहा कि पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जिया-उल-हक के कार्यकाल में भी पड़ोसी मुल्क में  घोर चरमपंथ को बढ़ावा दिया गया था।  

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दिग्विजय ने कहा, जवाहरलाल नेहरू का कथन था कि अल्पसंख्यकों की सांप्रदायिकता के मुकाबले बहुसंख्यकों की सांप्रदायिकता ज्यादा खतरनाक होती है। उन्होंने कहा, सांप्रदायिकता का भूत जब तक बोतल में बंद है, बंद है। लेकिन इसके एक बार बाहर निकलने के बाद इसे दोबारा बोतल में डालना आसान नहीं है।  

दिग्विजय ने यह भी कहा, भारत एक धार्मिक देश है। महात्मा गांधी इस देश की सनातनी संस्कृति में निहित सत्य, अहिंसा, प्रेम और सछ्वाव के संदेशों को अच्छी तरह समझते थे। लेकिन देश के वर्तमान हालात में सनातनी परंपरा वाले धर्म के साथ गांधी, भगवान महावीर और गौतम बुद्ध की अहिंसा की विचारधाराएं भी संकट में हैं, क्योंकि हिंसा को पनपाने वाले लोगों को महिमामंडित किया जा रहा है।

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