Monday, Jan 21, 2019

सफरनामा 2018: BJP के विजयरथ को रोकने में सफल रही कांग्रेस, इन राज्यों में लहराया जीत का परचम

  • Updated on 12/27/2018

नई दिल्ली/अमरदीप शर्मा। भारतीय राजनीति के लिए 2018 का साल काफी दिलचस्प रहा। मौसम का तापमान चाहे ठंड़ा हो या गर्म लेकिन सियासत की गरमी लोगों के सिर चढ़कर बोली। देश भर के 8 राज्यों में इस साल विधानसभा के आम चुनाव हुए। जिसमें जनता ने कई दिग्गजों के सिर जीत का शहरा सजा कर सत्ता के सिंहासन पर पहुंचाया तो दूसरी तरफ कई ऐसे नेता भी थे जिन्हें भारतीय राजनीति के सूरमा कहलाने के बाद भी हार का स्वाद चखना पड़ा। मसलन मुकाबला काफी रोचक रहा। 

बता दें कि साल 2018 में देशभर के 8 राज्यों में विधानसभा के चुनाव हुए जिनमें राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, तेलंगाना, मिजोरम, त्रिपुरा और नागालैंड में चुनाव हुए। इन चुनावों में एक बात खास देखने को मिली वो है कि ज्यादातर जगह बीजेपी को सत्ता से बेदखल होना पड़ा। करीब पूरे देश में विजय रथ पर सवार होकर घूमने वाली भारतीय जनता पार्टी को इस साल करारा झटका लगा। चलिए तो हम चर्चा करते है कि किस राज्य में कब चुनाव हुए। इसके अलावा कौन जीत दर्ज करने में सफल रहा तो किसको हार का सामना करना पड़ा। 

कर्नाटक

12 मई को 224 सदस्यीय कर्नाटक विधानसभा की 222 सीटों पर मतदान हुआ जिसमें कोई भी दल स्पष्ट बहुमत प्राप्त नहीं कर पाया। अलबत्ता कांग्रेस को पीछे छोड़ते हुए भाजपा पहले स्थान पर, कांग्रेस दूसरे और जद (एस) तीसरे स्थान पर रहा। दोनों बड़ी पार्टियां अपनी-अपनी जीत के दावे कर रही थीं । ऐसे में जद (एस.) नेता कुमारस्वामी ने कहा था कि वह किंग मेकर नहीं बल्कि किंग ही बनेंगे। हुआ भी कुछ ऐसा ही। लंबे सियासी घमासान के बाद कुमार स्वामी हारकर भी बाजीगर हो गए और सीएम की कुर्सी हासिल कर ली। 

गौरतलब है कि चुनाव परिणामों के रुझान आते ही किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत न मिलता देख राजनीतिक दलों में रस्साकशी शुरू हो गई। बदले हुए राजनीतिक माहौल में कांग्रेस ने जद (एस) को सरकार बनाने के लिए समर्थन देने की घोषणा कर दी है और जद (एस) ने भी इससे हाथ मिलाने के संकेत दे दिए हैं। आखिरकार इस तरह पहले नंबर की पार्टी होने के बाद भी भारतीय जनता पार्टी ने राज्य में सरकार बनाने का मौंका गंवा दिया। 

राजस्थान

राजस्थान में हुए विधानसभा चुनाव में इस बार फिर परंपरा को बरकरार रखते हुए राजस्थान के मतदाताओं ने सत्ता परिवर्तन के सिलसिले को कायम रखा। 7 दिसंबर को राज्य में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान हुआ। जिसमें जनता ने बढ़चढ़कर अपने मत का अधिकार करते हुए बंपर वोट डाले। इसके बाद 11 दिसंबर को जब चुनाव के नतीजे आए तो बीजेपी के नेताओं के चेहरे और कमल दोनों ही मुर्झा गए। इसके विपरित कांग्रेसी खेमे में जीत की लहर दौड़ गई। राजस्थान में कांग्रेस ने बीजेपी को सत्ता से बेदखल करके राज्य में सरकार बनाई। कांग्रेस पार्टी 99 सीटों पर जीत दर्ज करने में कामयाब रही। 

हालांकि राज्य में जीत दर्ज करने के बाद कांग्रेस पार्टी के अंदर सीएम पद को लेकर घमासान चलता रहा। सीएम पद के दो दावेदार अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच रस्सा कस्सी चलती रही। पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी को फैसला लेने में काफी जद्दोजहद करनी पड़ी। इसके बाद अंत में अशोक गहलोत को सीएम और सचिन पायलट को डुप्टी सीएम चुना गया। 

मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश में पिछले 15 साल से भारतीय जनता पार्टी का कब्जा था। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की छवि को डिगाना किसी के लिए भी मुश्किल साबित हो रहा था। लेकिन इस बार कांग्रेस पार्टी लंबे समय बाद वापसी करने में सफल रही। हालांकि कांग्रेस इस बार भी पूर्ण बहुमत से सरकार बनाने में कामयाब नहीं हो पायीष मसलन उस सपा और बसपा जैसी पार्टियों के साथ गठबंधन करके सरकार बनानी पड़ी। पार्टी इस बार 114 सीटों पर जीतने में कामयाब रही। पूर्ण बहुमत के लिए 116 की दरकरार थी। हालांकि राजस्थान की तरह एमपी में भी सीएम पद को लेकर घमासान चलता रहा। अंत में पार्टी हाईकमान ने कमलनाथ को सीएम नियुक्त किया।  

छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में भी मध्यप्रदेश की तरह पिछले 15 सालों से भाजपा सत्ता में बनी हुई थी। डॉ रमन सिंह राज्य में मुख्यमंत्री के पद पर विराजमान थे। जिसके बाद उन्हें सत्ता से हटाना मुश्किल काम लग रहा था। लेकिन इस बार कांग्रेस का पंजा सब पर भारी पड़ा। लंबे इतजार के बाद कांग्रेस राज्य में वापसी करने में सफल रही। जिसके बाद भूपेश भघेल को छत्तीसगढ़ का सीएम नियुक्त किया गया।  

तेलंगाना

 तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के अध्यक्ष के चंद्रशेखर राव (केसीआर)ने दूसरी बार तेलंगाना के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। राज्य में समयपूर्व, सात दिसंबर को हुए विधानसभा चुनाव में राव की पार्टी ने शानदार जीत हासिल की थी। केसीआर के नाम से लोकप्रिय राव को राजभवन परिसर में आयोजित सादे समारोह में राज्यपाल ई. एस. एल. नरसिम्हन ने पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। राव के साथ पार्टी एमएलसी मोहम्मद महमूद अली ने भी बतौर मंत्री पद की शपथ ली। अली पूर्ववर्ती टीआरएस सरकार में उपमुख्यमंत्री थे। राज्य में 119 विधानसभा सीटों के लिए सात दिसंबर को हुए चुनाव में टीआरएस को 88 सीटें मिली हैं। वहीं कांग्रेस की अगुवाई में बना ‘प्रजा कुटमी’ गठबंधन केवल 21 सीटें ही जीत पाया। राज्य में भाजपा को केवल एक ही सीट मिली है।

मेघालय

 3 मार्च को आए नतीजों में 60 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के खाते में 21 , एनपीपी के पाले में 19 और बीजेपी ने 2 सीटों पर जीत दर्ज की थीं। वहीं, यूनाईटेड डेमोक्रेटिक पार्टी के 6 विधायक और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के 2 विधायक चुने गए थे। एनसीपी और खुन हनीट्रैप नेशनल अवेकिंग मूवमेंट के खाते में 1-1सीट आई है। इसके अलावा तीन निर्दलीय विधायक भी चुनाव जीते हैं। मेघालय के नए मुख्यमंत्री के रुप में आज कोनराड संगमा शपथ लिया। सीएम संगमा के साथ 11 अन्य विधायकों ने भी मंत्री पद की शपथ ली।

मिजोरम

 मिजोरम में मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) ने विधानसभा चुनावों में शानदार जीत दर्ज करते हुए प्रदेश में कांग्रेस के 10 साल के शासन का अंत किया। एमएनएफ ने 40 सदस्यीय विधानसभा में 26 सीटों पर जीत दर्ज की है। यह 2013 के मुकाबले 21 सीट ज्यादा है। कांग्रेस को महज पांच सीटों पर संतोष करना पड़ा जबकि 2013 के चुनावों में उसके खाते में 34 सीटें आई थीं। मिजोरम के 1987 में पूर्ण राज्य बनने के बाद कोई भी दल लगातार तीन बार प्रदेश में सरकार नहीं बना सका है। निवर्तमान मुख्यमंत्री लल थनहवला ने दो सीटों से चुनाव लड़ा था और उन्हें दोनों ही सीटों पर शिकस्त का सामना करना पड़ा। थनहवला ने सेरसिप और चंपाई दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था।

नागालैंड

नगालैंड में भी इस साल विधानसभा के आम चुनाव हुए जिसमें 60 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी-एनडीपीपी गठबंधन और सत्ताधारी नगा पीपुल्स फ्रंट को 29-29 सीटें मिली थीं।  यहां एक सीट पर निर्दलीय और एक पर जनता दल यूनाइटेड (JDU) प्रत्याशी ने जीत दर्ज की है। कांग्रेस को यहां एक भी सीट नहीं मिली है। इसके बाद नेफ्यू रियो मुख्यमंत्री चुन लिए गए। 

त्रिपुरा

साल 2018 में त्रिपुरा में हुए विधानसभा की 60 सीटों पर चुनाव हुए। जिसमें भारतीय जनता पार्टी ने शानदार जीत दर्ज की थी। जिसमें  43 सीटों पर बीजेपी ने जीत दर्ज की है। यहां पिछले 25 सालों से सत्ता में काबिज लेफ्टिस्ट पार्टी सीपीएम को महज 16 सीटों से संतोष करना पड़ा।  पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी को एक भी सीट पर जीत नहीं मिली थी इस बार वही स्थिति कांग्रेस की है। इसके बाद बिप्लव देव के सीएम नियुक्त किया। 

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