Tuesday, Jun 22, 2021
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गठबंधन की राजनीति में कमजोर पड़ी कांग्रेस, सीट शेयरिंग में आ रही ये समस्या

  • Updated on 3/3/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। देश में पांच राज्य में विधानसभा चुनाव (Assembly Election) का ऐलान हो चुका है। बिहार विधानसभा चुनाव के परिणाम में कांग्रेस (Congress) के प्रदर्शन का असर इन राज्यों में देखा जा सकता है। इन राज्यों में कांग्रेस पर दबाव बढ़ गया है। गठबंधन में बड़े भाई की भूमिका निभाने वाली राजनीतिक दल कांग्रेस को पिछले विधानसभा चुनाव से भी कम सीट ऑफर की गई है और यही कारण है कि अभी तक तमिलनाडु में डीएमके के साथ सीट बंटवारा नहीं हो पाया है।

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डीएमके ने कांग्रेस को दी कम सीटें
तमिलनाडु की बात करें तो यहां कांग्रेस का प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं रहा। साल 2011 के चुनाव में 63 सीटों पर कांग्रेस चुनावी मैदान में उतरी थी और पांच सीटें जीती। इस परिणाम का असर रहा कि साल 2016 के चुनाव में डीएमके ने कांग्रेस को कम सीटें देते हुए 22 सीटों पर सीमित कर दिया, कांग्रेस इस बार भी बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाई और सिर्फ आठ सीटें जीती। ऐसे में आगे 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी डीएमके के साथ 8 सीटें जीतने में सफल रही।

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पुडुचेरी में भी डीएमके को पहले के मुकाबले ज्यादा सीटे मिली
जानकारी के अनुसार डीएमके ने इस बार 18 सीटें ऑफर की हैं। इतनी कम सीटें पार्टी को मंजूर नहीं हैं। पार्टी की कोशिश है कि 2016 के चुनाव के बराबर सीटें मिलें, पर गठबंधन धर्म निभाते हुए कुछ कम सीट पर भी विचार कर सकती है। डीएमके को सीटों की संख्या कम से कम 25 से ज्यादा करनी होगी। पुडुचेरी में भी डीएमके इस बार पिछले चुनाव के मुकाबले ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है।

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पश्चिम बंगाल में 27 मार्च होगा चुनाव
बता दें कि पश्चिम बंगाल में चुनाव की तारीखें अब नजदीक आ रही हैं। यहां 27 मार्च से 29 अप्रैल के बीच आठ चरणों में मतदान होना है। एक अप्रैल को दूसरे फेज का मतदान, 6 अप्रैल को तीसरे फेज का मतदान, 10 अप्रैल को चौथे फेज का मतदान, 17 अप्रैल को पांचवे फेज का मतदान, 22 अप्रैल को छठे 22 अप्रैल को छठे फेज का मतदान, 26 अप्रैल को सातवें फेज का मतदान और 29 अप्रैल को आखिरी आठवें फेज का मतदान होगा। ऐसे में पहले से ही सभी पार्टियों की तैयारी जोरो पर है। बंगाल में विधानसभा की 294 सीटें है।

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चुनाव में जाति का फैक्टर
गौरतलब है कि 2016 के चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 211 सीटों पर जीत दर्ज की थी, ऐसे में इस बार कुछ ऐसे फैक्टर हैं जो इस चुनाव को अलग बनाते है। इस बार पश्चिम बंगाल में पहली बार जाति का फैक्टर सामने आया है। पश्चिम बंगाल में खास तौर पर नदिया और उत्तर 24 परगना जिले में लगभग डेढ़ करोड़ मतुआ समुदाय के लोग रहते हैं।

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