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कांग्रेस में दिग्विजय के खिलाफ उठे विरोध के स्वर, क्या फिर लगेगा कांग्रेस को झटका?

  • Updated on 3/23/2020

नई दिल्ली/ प्रियंका। मध्य प्रदेश से कमलनाथ सरकार विदा ले चुकी है। कमलनाथ (Kamalnath) के जाने के बाद कांग्रेस की उम्मीदें दिग्विजय सिंह पर टिकी है। वजह है, मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीट जिन पर चार प्रत्याशी मैदान में उतारे गए हैं। जिनमें बीजेपी के ज्योतिरादित्य सिंधिया ( Jyotiraditya Scindia) और सुमेर सिंह सोलंकी (Sumer Singh Solanki) शामिल हैं तो वहीँ कांग्रेस की तरफ से दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) और फूल सिंह बरैया (Phool Singh Baraiya) पर दांव लगाया गया है।

इन प्रत्याशियों में से कांग्रेस ने पहली वरीयता दिग्विजय सिंह को दी है जबकि फूल सिंह बरैया को दूसरे स्थान पर रखा है। लेकिन अब यही वरीयता कांग्रेस के लिए मुश्किल खड़ी करने लगी है। दरअसल, कमलनाथ के बाद अब दिग्विजय के खिलाफ कांग्रेस में विरोध के स्वर उठने लगे हैं। ये विरोध के स्वर कांग्रेस के लिए आगामी दिनों में दूसरे झटके का कारण बन सकते हैं!

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बरैया के पक्ष में उतरे नेता
दरअसल, पार्टी हाईकमान को कांग्रेस के कुछ दिग्गज नेताओं ने राज्यसभा उम्मीदवार फूलसिंह बरैया के पक्ष में एक पत्र लिखा है। इस पत्र में नेताओं ने अनुसूचित जाति और जनजाति (SC/SC) के वोट बैंक का फायदा लेने के लिए बरैया को प्राथमिकता क्रम में पहले नंबर पर रखकर उन्हें राज्यसभा में भेजने की मांग की है। नेताओं का कहना है कि बरैया के राज्यसभा में जाने से कांग्रेस को उपचुनाव में अनुसूचित जाति और जनजाति वोट बैंक का लाभ मिलेगा।

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बरैया को मिले प्राथमिकता
मौजूदा समीकरण के हिसाब से कांग्रेस अब सिर्फ एक सीट जीतने की स्थिति में है। ऐसे में पार्टी हाईकमान से उम्मीदवारी तय करने की मांग की गई है। बरैया को मुख्य उम्मीदवारी देने की मांग करते हुए और उनकी ग्वालियर-चंबल संभाग में अजा-जजा वोट बैंक पर पकड़ बताते हुए नेताओं ने आगामी विधानसभा उपचुनाव में पार्टी को ज्यादा से ज्यादा सीटें मिलने की उम्मीद जताई है।

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दिग्विजय को करना होगा त्याग
1977 में दिग्विजय सिंह को कांग्रेस पार्टी में लाया गया था। इसके बाद उन्हें विधानसभा चुनाव का टिकट दिया गया और फिर कांग्रेस के टिकट पर वो लोकसभा में गए। इसके बाद दिग्विजय को मध्य प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बना दिया गया। कांग्रेस उन पर महरबान रही है इसका सबूत ये कि कांग्रेस ने 10 साल तक दिग्विजय को मुख्यमंत्री बनाया और फिर राज्यसभा भी भेजा और जब 15 साल के बाद मध्यप्रदेश में सरकार बनी तो मुख्यमंत्री कमलनाथ जरुर थे, लेकिन सुपर मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ही बने।

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कांग्रेस ने दिग्विजय को ज्यादा दिया
इस दौरान यह भी अनुमान लगाए जा रहे हैं कि दिग्विजय ने अपने बेटे और दो बार के विधायक जयवर्धन सिंह को मंत्री बनाने के लिए मापदंड तय कराए और आगे भी अगर दिग्विजय सिंह को मौका मिलता रहा तो वो फिर ऐसा करेंगे।

कांग्रेस आलाकमान को पत्र लिखने वाले नेताओं का कहना है कि आगे ऐसा न हो और उपचुनावों में कांग्रेस को हार का सामना न करने पड़े इसके लिए दिग्विजय सिंह को कांग्रेस के लिए कुछ त्याग करना होगा। कांग्रेस को दिग्विजय ने कम, कांग्रेस ने उन्हें ज्यादा दिया है और अब उनकी बारी है। बरैया को प्राथमिकता देने में वो भी अपना सहयोग दिखाएं। बता दें, 26 मार्च को मध्यप्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होना है।

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