Sunday, Nov 28, 2021
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बैंक डिफॉल्टर्स को लेकर चिदंबरम बोले- RBI के पास बचा है अब आखिरी रास्ता

  • Updated on 4/30/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। देश से फरार मेहुल चोकसी, नीरव मोदी और विजय माल्या समेत 50 बैंक डिफॉल्टर्स के 68,607 करोड़ रुपये माफ करने के खुलासे के बाद सियासत तेज हो गई है। विपक्ष ने केंद्र की मोदी सरकार को जहां आड़े हाथ लिया है, वहीं आरबीआई को भी सतर्क रहने और जरूरी कदम उठाने की सलाह दी है। 

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कांग्रेस ने खासतौर केंद्र पर हमला तेज कर दिए हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन का इंटरव्यू लेकर कई मुद्दों को उठा दिया है, वहीं कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने आर्थिक मुद्दों पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है।

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पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने भी मोर्चा खोल दिया है। बैंक डिफॉल्टर्स मुद्दे पर चिदंबरम को लगता है कि आबीआई के पास अब सिर्फ एक आखिरी रास्ता बचा है कि वह बैंकों को खास निर्देश दे और उनके बाद लोन रिकवरी के लिए जरूरी कदम उठाए।

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चिदंबरम अपने ट्वीट में लिखते हैं, ' छूट और बट्टे खाते में डालने पर बहस जारी रहना आकेदमिक है। जो लोग खुश होंगे वे नीरव मोदी, मेहुल चौकसी और विजय माल्या हैं। नियम मानव ने बनाए हैं। अगर नियम बन सकते हैं तो इन्हें खत्म भी किया जा सकता है। ' 

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चिदंबरम अपने ट्वीट में लिखत हैं, ' भारी गलती को सही करने का एक ही रास्ता है कि आरबीआई संबंधित बैंकों को निर्देश दें कि वे एंट्रीज को बचा कर रखें और लगातार बड़े लोन लेकर भागने वाले को अपनी बुक में उजागर करते रहें और फिर इन्हें रिकवर करने के कदम उठाएं।'

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चिदंबरम ने प्रवासी श्रमिकों को उनके घर पहुंचाने का मुद्दा भी उठाया है। वह लिखते हैं, 'मैं प्रवासी श्रमिकों और छात्रों का जांच के बाद बस से अंतर-राज्यी आवाजाही की अनुमति देने के सरकार के निर्णय का स्वागत करता हूं। इसकी  मांग अप्रैल के मध्य से ही कांग्रेस पार्टी कर रही है। अकेले बसें पर्याप्त नहीं होंगी। बेहतर होगा कि सेनीटाइज करके ट्रेन से अपने गृह राज्य में वापस जाने  की इच्छा रखने वाले बड़ी संख्या में लोगों को पॉइंट टू पॉइंट स्थानांतरित किया जाए।'
 

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बता दें कि इससे पहले कांग्रेस सोशल मीडिया के जरिए सवाल उठाती रही है। अपने एक ट्वीट में कांग्रेस ने लिखा था, 'भाजपा सरकार ने 2014 के बाद से ₹6.6 लाख करोड़ बट्टे-खाते में डालकर बड़े उद्योगपति मित्रों के प्रति अपना दायित्व निभाया है। पीएम गरीब कल्याण योजना से 4 गुणा अधिक बजट अमीर कल्याण पर लगाया जा रहा है।'

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अन्य ट्वीट में पार्टी ने पूछा, 'जानबूझकर कर्ज ना चुकाने वालों की लिस्ट में भाजपा सरकार के मित्रों को रखा गया है। इस लिस्ट में डाले गए कई चेहरों को प्रधानमंत्री के साथ कई बार सार्वजनिक मंचों पर भी देखा गया है। प्रधानमंत्री देश के प्रति दायित्व निभा रहे हैं या अपने बड़े उद्योगपति मित्रों के प्रति?'
 

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